न पुलिस, न गार्ड: 15 सेकंड में हमलावर को अंधा कर देगा अमेरिकी स्कूलों का ये नया ड्रोन
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अमेरिका के स्कूलों में बढ़ती गोलीबारी की घटनाओं को रोकने के लिए अब एक अनोखी और हाई-टेक रणनीति अपनाई जा रही है। स्कूलों में पेपर स्प्रे ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं, जो पुलिस के पहुंचने से पहले ही हमलावर को बेअसर करने का माद्दा रखते हैं।

कैंपस गार्डियन एंजल की ताकत

टेक्सास की कंपनी मिथ्रिल डिफेंस ने इन ड्रोन्स को विकसित किया है। इन्हें कैंपस गार्डियन एंजल नाम दिया गया है। ये ड्रोन स्कूल के गलियारों में 50 से 70 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं और अलार्म बजने के महज 15 सेकंड के भीतर हमलावर तक पहुंचने में सक्षम हैं। ये ड्रोन खिड़कियां तोड़ने में भी माहिर हैं।

कैसे काम करता है ये सिस्टम?

जब कोई शिक्षक पैनिक बटन दबाता है, तो तुरंत कंट्रोल सेंटर को लाइव फीड मिल जाती है। 5 सेकंड में लक्ष्य की पहचान होती है और ड्रोन कार्रवाई के लिए निकल पड़ता है।

  1. चेतावनी: पहले ड्रोन तेज आवाज वाले एयर पॉपर से हमलावर को सरेंडर करने को कहता है।
  2. हमला: जरूरत पड़ने पर पेपर स्प्रे (मिर्च का अर्क) दागा जाता है।
  3. टक्कर: अंतिम विकल्प के तौर पर ड्रोन 70 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हमलावर से टकरा भी सकता है। इसमें लाइट, सायरन और स्पीकर भी लगे हैं।

कहां शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट?

फिलहाल यह तकनीक फ्लोरिडा (3), जॉर्जिया (5) और कोलोराडो (1) के कुल नौ स्कूलों में तैनात की जा रही है। इन राज्यों का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि ये बीते वर्षों में सबसे भयावह स्कूली गोलीबारी का दंश झेल चुके हैं। कंपनी का तर्क है कि शूटिंग के शुरुआती 120 सेकंड सबसे घातक होते हैं, और यही वह समय है जब ये ड्रोन जान बचा सकते हैं।

तकनीक पर उठते सवाल

हालांकि यह तकनीक भविष्यवादी लग रही है, लेकिन इसके साथ कई विवाद भी जुड़े हैं। अभिभावकों और शिक्षाविदों का कहना है कि अगर तकनीकी खराबी के चलते ड्रोन ने किसी छात्र पर पेपर स्प्रे कर दिया तो क्या होगा?

आलोचकों का तर्क है कि गलत पहचान (mistaken identity) का खतरा बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, भागते हुए मासूम बच्चों या मौके पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों के लिए भी ये ड्रोन खतरनाक हो सकते हैं। साथ ही, शिक्षा के बजट को पढ़ाई के बजाय ऐसे हथियारों पर खर्च करने को लेकर भी आलोचना हो रही है। फिलहाल, पॉलिसी मेकर्स इस पर सख्त सुरक्षा दिशा-निर्देश बनाने पर जोर दे रहे हैं।

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