# कर्मचारी नहीं, सीधे DM से बात करेंगे! गया के सरकारी स्कूल में बच्चों का जोरदार प्रदर्शन
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गया: बिहार के गया जिले के एक सरकारी स्कूल में व्यवस्था से तंग आकर स्कूली बच्चों ने अनोखा और सख्त तेवर दिखाया है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने स्कूल परिसर में ही मोर्चा खोल दिया और साफ कह दिया कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहिए।

क्या है मामला? स्कूल में पंखे खराब हैं, चापाकल (हैंडपंप) सालों से बंद है और बैठने के लिए बेंच तक नसीब नहीं हैं। भीषण गर्मी में बिना पंखे के पढ़ाई करने को मजबूर छात्र अपनी बदहाली से तंग आ चुके थे। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली, तो बच्चों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

साफ इनकार: अधिकारी से कम में बात नहीं छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और शुरुआत में एक कर्मचारी को मौके पर भेजा गया। लेकिन बच्चों ने उस कर्मचारी से बात करने से सिरे से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि समस्या का समाधान केवल आश्वासन से नहीं होगा, इसलिए उन्हें केवल जिला पदाधिकारी (DM) चाहिए।

दौड़कर स्कूल पहुंचे बड़े अधिकारी बच्चों के अड़ियल रुख और जागरूकता को देखते हुए प्रशासन को मजबूरन एक बड़े अधिकारी को स्कूल भेजना पड़ा। अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर बच्चों की समस्याएं सुनीं, स्कूल की जर्जर व्यवस्था का जायजा लिया और जल्द ही जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कड़ा निर्देश दिया। अधिकारी के आश्वासन के बाद ही छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।

बदल रही है नई पीढ़ी की सोच यह घटना दर्शाती है कि अब केवल Gen-Z ही नहीं, बल्कि स्कूल जाने वाली Gen-Alpha पीढ़ी भी अपने अधिकारों को लेकर बेहद जागरूक हो गई है। बच्चे अब चुपचाप समस्याओं को सहने के बजाय, उसे खुलकर सामने रख रहे हैं और प्रशासन से जवाबदेही मांग रहे हैं।

यह प्रदर्शन सरकार और प्रशासनिक अमले के लिए एक स्पष्ट संदेश है: अब सिर्फ खोखले वादों का दौर खत्म हो चुका है, शिक्षा और बुनियादी जरूरतों में किसी भी तरह की लापरवाही को छात्र अब बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं।

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