PoK में अपनों पर बरसी पाकिस्तानी गोलियां: आखिर क्यों नंगा हुआ पाकिस्तान का असली चेहरा?
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ, उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का राग अलापने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। जो मुल्क दुनिया के सामने दूसरों पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाता है, आज वही अपनी ही अवाम पर गोलियां बरसा रहा है।

125 से ज्यादा निर्दोषों की बलि PoK में अवाम के खिलाफ शुरू हुए इस खूनी खेल में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय रिपोर्ट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक 125 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शुरुआती दौर में पाकिस्तान ने मौतों के आंकड़ों को कम बताने की कोशिश की, लेकिन हकीकत अब दुनिया के सामने है।

महिलाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मीरपुर, रावलकोट और कोटली जैसे शहरों में शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहीं महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। सेना और पुलिस ने लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस का अंधाधुंध इस्तेमाल किया, जिसमें 50 से अधिक महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गई हैं।

इंटरनेट बंदी और खौफ का साया अपनी दरिंदगी की तस्वीरें दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पूरे PoK में इंटरनेट और संचार सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी हैं। हालांकि, इसके बावजूद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पाकिस्तान के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वाशिंगटन में स्थित पाकिस्तान दूतावास के बाहर भी इसे लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई तीखी नाराजगी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने PoK के हालातों पर कड़ी टिप्पणी की है। प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने स्पष्ट कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाना और निहत्थे नागरिकों पर बल प्रयोग करना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन है। इस टिप्पणी ने वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की साख को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया है।

अधिकारों के लिए सड़क पर उतरी अवाम जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में PoK की जनता झुकने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि वे बदहाली, कमरतोड़ महंगाई और बिजली कटौती के खिलाफ लड़ रहे हैं। सेना की गोलियों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद मार्च को और अधिक मजबूती के साथ दोबारा शुरू कर दिया है।

12 सीटों का विवाद और राजनीतिक दमन PoK में विरोध का एक बड़ा कारण राजनीतिक दमन भी है। यहां की विधानसभा में 12 सीटें कश्मीरी शरणार्थियों के नाम पर आरक्षित हैं। स्थानीय जनता का आरोप है कि पाकिस्तान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी मर्जी की कठपुतली सरकार बिठाने के लिए करता है। प्रदर्शनकारी इन सीटों को खत्म करने और अपने वाजिब हक की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, पाकिस्तान के लिए यह घरेलू संकट एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहां अपनी ही जनता का सामना करना अब उसके लिए मुश्किल साबित हो रहा है।

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