राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने NEET पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लंबे समय से जारी चुप्पी को तोड़ते हुए एक बड़ा बयान दिया है। लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मसले पर केवल राजनीति करने के बजाय ठोस समाधान के साथ सामने आना चाहते थे।
मेरी भूमिका बदल गई है अपनी चुप्पी के पीछे का कारण बताते हुए चड्ढा ने कहा कि जब वे विपक्ष में थे, तब सरकार से सवाल पूछना उनका मुख्य काम था। लेकिन अब जिम्मेदारी बदल गई है। उन्होंने कहा, मैंने खुद से वादा किया था कि संसद में तभी बोलूंगा जब हमारे पास समस्या का समाधान होगा। अब मेरा काम सवाल उठाना नहीं, बल्कि समाधान देना है।
पेपर लीक का इलाज बयानबाजी नहीं चड्ढा ने पेपर लीक की समस्या को एक पुरानी और गंभीर बीमारी करार दिया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, कैंसर का इलाज क्रोसिन (Crocin) से नहीं होता। इसी तरह पेपर लीक की समस्या का हल टीवी बहसों या राजनीतिक नारों से नहीं निकल सकता। इसके लिए मजबूत संस्थागत सुधार (Institutional reform) की जरूरत थी, जो इस विधेयक के माध्यम से किया गया है।
पंजाब और कर्नाटक का जिक्र अपने संबोधन में उन्होंने राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर बात की। उन्होंने पंजाब की फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए हुई नकल का जिक्र किया और AAP सरकार पर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक में SSLC परीक्षा में पेपर बिकने की घटनाओं का भी हवाला दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेपर लीक को किसी पार्टी या राज्य के चश्मे से नहीं, बल्कि जवाबदेही के नजरिए से देखना चाहिए।
लाखों छात्रों के दर्द पर बोले खुद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रह चुके राघव चड्ढा ने छात्रों की पीड़ा को करीब से महसूस करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि 22 लाख छात्र महीनों तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक उनके सपनों पर पानी फेर देता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक छात्रों के भरोसे को फिर से बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
राजनीति नहीं, समाधान चाहिए अंत में, राघव चड्ढा ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह वक्त आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने का है। चड्ढा के अनुसार, यह विधेयक भारत का पहला ठोस संस्थागत प्रयास है जो भविष्य में नकल माफियाओं पर लगाम लगाने का काम करेगा।
Cancer is not cured by Crocin.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) July 31, 2026
Paper Leak is not cured by soundbites.
It needed a real institutional fix, and today we gave it one.
That is why I stood in support of the Public Examination Amendment Bill 2026. Because this is India s first real, institutional answer to paper… pic.twitter.com/qKeI5xFSM5
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