NEET पेपर लीक पर क्यों खामोश थे राघव चड्ढा? सदन में खुद बताई वजह
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NEET पेपर लीक मामले में लंबे समय से चुप्पी साधे रखने पर उठे सवालों का जवाब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को संसद में दिया। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने न केवल अपनी खामोशी का कारण बताया, बल्कि छात्रों के दर्द को भी गहराई से महसूस किया।

मीडिया रिस्पॉन्स नहीं, संस्थागत समाधान की जरूरत राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का इलाज केवल मीडिया साउंडबाइट्स या शोर मचाने से नहीं हो सकता। उन्होंने इसे कैंसर जैसी बीमारी बताते हुए कहा कि इसका उपचार संस्थागत समाधान (Institutional Solution) के जरिए ही संभव है, जिसे मौजूदा सरकार इस बिल के माध्यम से लागू कर रही है।

मैं छात्रों का दर्द समझता हूं छात्रों के गुस्से को पूरी तरह से जस्टिफाइड बताते हुए राघव ने कहा कि एक छात्र जब NEET जैसे एग्जाम की तैयारी करता है, तो सिर्फ वह अकेला नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार संघर्ष करता है। मां अपनी जरूरतें और पिता अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा देते हैं। छात्र सालों तक घर से दूर रहकर 18-18 घंटे पढ़ाई करता है, लेकिन रिजल्ट के दिन जब पेपर लीक की खबर आती है, तो उसका सिर्फ पेपर नहीं, बल्कि उसका भविष्य और खुद पर से विश्वास भी लीक हो जाता है।

सांसद ने साझा किया अपना अनुभव राघव चड्ढा ने कहा कि वे इस दर्द को इसलिए बखूबी जानते हैं क्योंकि वे खुद भी चार्टेड अकाउंटेंसी (CA) के छात्र रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम का हिस्सा होने के नाते उन्हें पता है कि इस स्थिति से गुजरना कितनी बड़ी मानसिक प्रताड़ना है।

अब मेरी भूमिका बदल गई है अपनी चुप्पी पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, विपक्ष में रहते हुए सवाल उठाना मेरा काम था, जिसे मैंने ईमानदारी से किया। लेकिन अब मेरी भूमिका बदल गई है। अब मैं सत्ता पक्ष में हूं, जहां मेरी जिम्मेदारी सिर्फ शोर मचाना नहीं, बल्कि समस्या का ठोस समाधान देना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कैमरों के सामने आकर खुद को दिखाने की भूख नहीं है। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे संसद में तब तक नहीं बोलेंगे जब तक कि समाधान की ओर कदम न बढ़ जाएं। राघव ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि सरकार सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।

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