दिल्ली सरकार द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने के फैसले पर विवाद गहरा गया है। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सरकार के इस कदम को अधूरा बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
FIR बंद करना काफी नहीं, इन्हें वापस लिया जाए सौरव दास ने कहा कि सरकार ने केवल यह अधिसूचना जारी की है कि एफआईआर पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी और उन्हें बंद माना जा सकता है। उन्होंने इसे नाकाफी बताते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट रूप से सभी एफआईआर वापस लेने का ऐलान करना चाहिए था।
दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर एफआईआर वापस लेने से इनकार कर रही है, जो अदालत के आदेश की गलत व्याख्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने कहीं भी सरकार को एफआईआर वापस लेने से नहीं रोका है। उनके अनुसार, सरकार अदालत के आदेश को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम आपत्तिजनक भाषा प्रदर्शन के दौरान कथित अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर दास ने कहा कि यदि किसी को मानहानि का अनुभव होता है, तो वह सिविल या क्रिमिनल डिफेमेशन केस दर्ज करा सकता है।
हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल आपत्तिजनक शब्दों के आधार पर आपराधिक न्याय प्रणाली का उपयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाती हैं और समाज में डर का माहौल पैदा करती हैं।
कंगना रनौत और सौरव दास के बीच जुबानी जंग इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा सांसद कंगना रनौत और सौरव दास के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कंगना द्वारा दास को बेरोजगार और बेकार कहे जाने पर पलटवार करते हुए सौरव ने कहा कि एक्ट्रेस के पास गलत जानकारी है।
सौरव ने तंज कसते हुए कहा, गूगल पर मेरी उम्र 28 दिखाई जाती है, जबकि मैं 27 का हूं। मैं अपनी पहचान पत्रकार के रूप में रखता हूं। कंगना रनौत को भी स्टूडेंट ऑफ लाइफ बनने की कोशिश करनी चाहिए, शायद इससे उनमें थोड़ी समझदारी आए।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और सरकार का रुख बता दें कि ये एफआईआर 20 जुलाई को हुए चलो संसद मार्च के दौरान दर्ज की गई थीं। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे और भारी संपत्ति का नुकसान हुआ था।
दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन लोगों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही, गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की समीक्षा कर उन्हें रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अब देखना यह है कि क्या सरकार CJP की एफआईआर पूरी तरह वापस लेने की मांग को मानती है या गतिरोध बरकरार रहता है।
*VIDEO | Delhi: Reacting to the Delhi govt s order against adverse action on CJP protesters, CJP spokesperson Saurav Das says, The Delhi government released a notification stating that all the FIRs will not be pursued further and may be treated as closed. Now, we are not very… pic.twitter.com/nfiGWsNrQE
— Press Trust of India (@PTI_News) July 30, 2026
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