Delulu, FOMO और Micro Clap: संसद में गूंजी Gen-Z की भाषा, क्या है बीजेपी का कनेक्ट मंत्र?
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राजनीति अब केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, यह नैरेटिव और टोन का खेल है। भारत में संसद से लेकर सोशल मीडिया तक, सत्ता पक्ष अब देश के युवाओं से जुड़ने के लिए उनकी अपनी भाषा— Gen-Z स्लेंग —का सहारा ले रहा है। पीएम मोदी ने अपनी टीम को युवाओं के साथ उन्हीं के अंदाज में संवाद करने का मंत्र दिया है।

पीएम मोदी का फ्रेंड्स वाला अंदाज नीट पेपर लीक विवाद के बाद जब छात्र आक्रोशित थे, तो सरकार ने सीधे संवाद का रास्ता चुना। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक रील शेयर की, जिसमें मशहूर सिटकॉम ‘F.R.I.E.N.D.S.’ का सिग्नेचर ट्रैक ‘I’ll Be There For You’ इस्तेमाल किया गया। इसके साथ संदेश दिया गया— PM Modi is there for you. यह संदेश पारंपरिक राजनीतिक भाषा से हटकर सीधा युवाओं के डिजिटल कल्चर पर निशाना था।

बांसुरी स्वराज का Clock It जलवा संसद के अंदर भी यह बदलाव दिखा। पेपर लीक बिल पर चर्चा करते हुए सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा, कांग्रेस के समय के नियमों की खामियों को मोदी जी ने क्लॉक (Clock it) कर लिया है। इंटरनेट की दुनिया में Clock it का अर्थ है किसी छिपी सच्चाई को सटीक पकड़ लेना। अपनी बात रखते हुए उन्होंने माइक्रो क्लैप (Micro clap) का भी इस्तेमाल किया, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंडी है और स्मार्टनेस का प्रतीक माना जाता है।

विपक्ष पर Delulu और FOMO का तंज शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष को घेरने के लिए Gen-Z की शब्दावली का इस्तेमाल किया। शिंदे ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे MIA (Missing in Action) थे और उन्हें FOMO (Fear of Missing Out) हो रहा है। वहीं तेजस्वी सूर्या ने विपक्ष के दावों को Delulu (Delusion यानी भ्रम) करार दिया। उनका तर्क था कि युवा राजनीतिक नारों के बजाय समाधान चाहते हैं, और यह समझना विपक्ष का सबसे बड़ा भ्रम है।

युवाओं तक पहुंचने की रणनीति एनडीए की इस नई रणनीति के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट है। Delulu , FOMO और Clock it जैसे शब्दों का इस्तेमाल संसद की नीरस बहसों को सोशल मीडिया के अनुकूल बनाना है। ऐसे शब्दों और बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर जल्दी वायरल होता है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह केवल भाषा का बदलाव नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में खुद को यूथ-सेंट्रिक दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश है। बीजेपी संसद की गंभीर कार्यवाही को युवाओं के स्क्रीन तक ले जाने के लिए अब इंटरनेट की इसी हिप भाषा का उपयोग कर रही है।

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