पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने देश की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से निपटने का हमारा तरीका अभी भी औपनिवेशिक ब्रिटिश मानसिकता से ग्रस्त है, जिसे बदलने की तत्काल आवश्यकता है।
सशस्त्र बल नहीं, सिविल पुलिस हो पहली ढाल किरण बेदी का मानना है कि किसी भी प्रदर्शन में सीधे हथियारबंद सुरक्षा बलों को तैनात करना एक बड़ी प्रणालीगत खामी है। उनके अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को संभालते समय पहली पंक्ति में हमेशा प्रशिक्षित सिविल पुलिस या सिविल डिफेंस के जवान होने चाहिए। इनका काम लाठी चलाने के बजाय संवाद के जरिए भीड़ को नियंत्रित करना होना चाहिए।
महिला पुलिस और सुरक्षा उपकरण का उपयोग प्रदर्शनों के दौरान बल प्रयोग को कम करने का सुझाव देते हुए बेदी ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हैं, तो महिला पुलिसकर्मियों को मोर्चा संभालना चाहिए। उनके पास लाठी के बजाय हेलमेट, हेडगियर और बॉडी आर्मर जैसे सुरक्षा उपकरण होने चाहिए। इससे बिना हिंसक टकराव के स्थिति को नियंत्रित करना संभव होगा।
जिम्मेदारी मौके पर मौजूद अधिकारी की लोकसभा में विपक्ष के नेता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बेदी ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी केंद्रीय निर्देश या गृह मंत्री के आदेश का इंतजार करना गलत है। उन्होंने कहा कि मौके पर मौजूद सबसे वरिष्ठ अधिकारी ही निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। यदि वह उपलब्ध न हो, तो ऑन-ड्यूटी अधिकारी को हालात के अनुसार फैसला लेने का पूरा अधिकार है।
अंतिम विकल्प हो लाठी और आंसू गैस किरण बेदी ने जोर दिया कि लाठीचार्ज, आंसू गैस या वाटर कैनन का इस्तेमाल केवल तभी होना चाहिए जब स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि हर प्रदर्शन की ड्रोन से निगरानी और वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए ताकि हिंसा और आगजनी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान स्पष्ट हो सके।
संसद की ओर मार्च पर रोक जरूरी प्रदर्शनों के स्थान को लेकर भी बेदी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भीड़ को सीधे संसद की ओर बढ़ने देने के बजाय रामलीला मैदान जैसे बड़े और निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जंतर-मंतर जैसे तंग इलाकों में विरोध प्रदर्शन न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि वहां के स्थानीय व्यापार और आम जनजीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
#WATCH | Delhi: On Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi s statement, Former IPS officer Kiran Bedi says, Responsibility for law and order lies with the most senior officer present at the scene. Even if a senior officer is not there, it is up to the personnel on the ground… pic.twitter.com/eOgP0mUBg5
— ANI (@ANI) July 30, 2026
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