मुंबई के रेस्टोरेंट्स में मचा हड़कंप: क्या तुकाराम मुंडे बने फूड सेक्टर के नए सिंघम ?
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मुंबई के पॉश क्लबों, ऐतिहासिक फूड जॉइंट्स और आलीशान रेस्टोरेंट्स के किचन में इन दिनों सन्नाटा पसरा है। दशकों से लोगों की पसंद बने ये ठिकाने अब महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के रडार पर हैं। विभाग के नए प्रमुख तुकाराम मुंडे की एंट्री के साथ ही मुंबई के खाद्य उद्योग में खलबली मच गई है।

100 नामी प्रतिष्ठानों पर गिर चुकी है गाज

25 मई को पदभार संभालने के बाद से ही IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक लगभग 100 बड़े रेस्टोरेंट्स और होटलों के लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं। इस सख्ती ने कारोबारियों की नींद उड़ा दी है, जबकि आम जनता यह चर्चा कर रही है कि क्या मुंबई को फूड सेफ्टी के मामले में अपना पहला सिंघम मिल गया है।

मंत्रालय की कैंटीन भी नहीं बची

मुंडे की निष्पक्षता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मुहिम में कोई रसूख काम नहीं आ रहा। चर्चगेट के मशहूर के रुस्तम एंड कंपनी से लेकर खुद सरकारी मंत्रालय की कैंटीन तक, जांच की चपेट में आ चुकी है। मुंडे का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सेहत सुनिश्चित करने के लिए है।

सिंघम होने के दावे पर क्या बोले मुंडे?

खुद पर लग रहे सिंघम वाले टैग पर तुकाराम मुंडे ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी को डराना नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी निभाना है। उन्होंने कहा, जहाँ केवल छोटी या तकनीकी कमियां हैं, वहां 14 दिन का सुधार नोटिस दिया जाता है। लेकिन जहां उपभोक्ताओं की सेहत से सीधा खिलवाड़ हो, वहां कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और मुंडे का रुख

हाल ही में नवी मुंबई के एक होटल ने लाइसेंस सस्पेंशन के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने FDA को नियमों के पालन में व्यावहारिक नजरिया अपनाने की सलाह दी। इस पर मुंडे ने दो टूक जवाब दिया कि वे मनमानी नहीं, बल्कि FSSAI के निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि जनता की जान से बढ़कर कोई व्यापार नहीं हो सकता।

बदल गया है पूरा सिस्टम

मुंडे ने बताया कि साल 2011 से पहले का कानून केवल मिलावट रोकने पर केंद्रित था, लेकिन अब फोकस फूड सेफ्टी और हाइजीन के कड़े मानकों पर है। उनका यह 180 डिग्री का बदलाव पूरे सिस्टम के लिए नया है। सिंथेटिक दूध माफियाओं से लेकर नामी रेस्टोरेंट्स तक, मुंडे की इस ज़ीरो टॉलरेंस नीति ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में मुंबई के फूड सेक्टर में सुरक्षित खाना ही एकमात्र विकल्प होगा।

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