बादलों का घर प्यासा: क्यों दुनिया के सबसे नम इलाके में इस बार पसरा है सूखा?
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दुनिया में सबसे अधिक बारिश के लिए मशहूर मेघालय में इस बार मानसून का चेहरा बिल्कुल बदला हुआ है। चेरापूंजी और मासिनराम जैसे इलाके, जो अपनी बेतहाशा बारिश के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते रहे हैं, इस बार बादलों की मेहरबानी का इंतजार कर रहे हैं। मानसून अपने चरम पर होने के बावजूद, मेघालय में अब तक बारिश में 57 फीसद की भारी कमी दर्ज की गई है।

57% की भारी गिरावट: क्या है ताजा आंकड़े?

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 4 जून से 28 जुलाई के बीच मेघालय में सामान्य तौर पर 632.1 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन मात्र 272.9 मिमी ही दर्ज हुई है। यह स्थिति केवल मेघालय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा पूर्वोत्तर भारत इसकी चपेट में है। आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान मणिपुर में 42%, असम में 40% और अरुणाचल प्रदेश में 40% बारिश कम हुई है।

मानसून का रास्ता क्यों भटका?

मानसून की सामान्य प्रक्रिया में बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नम हवाएं पूर्वोत्तर की पहाड़ियों से टकराकर भारी बारिश कराती हैं। लेकिन इस बार, बंगाल की खाड़ी में बना एक गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र ओडिशा के रास्ते मध्य भारत की ओर मुड़ गया। मानसून की सारी नमी ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर खिंच गई, जिससे उत्तर भारत में तो बारिश हुई, लेकिन पूर्वोत्तर का इलाका मुख्य मानसूनी पट्टी से बाहर हो गया।

सैटेलाइट और जमीनी हकीकत

भारतीय मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस की तस्वीरें पुष्टि करती हैं कि मेघालय के ऊपर बादल बिखरे हुए और कमजोर हैं। शिलांग मौसम केंद्र के अनुसार, सोहरा और मासिनराम जैसे क्षेत्रों में भी केवल हल्की बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, तापमान में गिरावट के कारण मौसम सुहावना बना हुआ है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों और पर्यटन उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन का संकेत है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल एक मानसून से निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारतीय मानसून पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित और जटिल होता जा रहा है। अर्थ साइंस मंत्रालय की रिपोर्ट भी बताती है कि बढ़ते तापमान के कारण अब बारिश का वितरण असमान हो गया है—कहीं जरूरत से ज्यादा बाढ़, तो कहीं सूखे जैसे हालात।

भविष्य पर मंडराते खतरे

अगर अगस्त में भी स्थिति नहीं सुधरी, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

क्या उम्मीद बाकी है?

राहत की बात यह है कि मानसून सत्र अभी समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि मानसून ट्रफ (Mansoon Trough) सही दिशा में खिसकती है, तो मेघालय में बारिश की कमी में सुधार की पूरी संभावना है। फिलहाल, बादलों के इस घर की निगाहें अगस्त के बादलों पर टिकी हैं।

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