क्या एक ना जिंदगी बदल सकती है? एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रचीति पारकर की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रचीति ने खुलासा किया है कि कैसे करियर के शुरुआती दौर में मिले रिजेक्शन ने न केवल उनके हौसले को टूटने नहीं दिया, बल्कि उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी तक पहुंचा दिया।
जब भारत में मिली अस्वीकृति ने बदली तकदीर प्रचीति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया कि अमेरिका जाने से पहले उन्होंने Microsoft India में नौकरी के लिए आवेदन किया था। उस समय उनकी योजना थी कि यदि उन्हें भारत में अच्छी नौकरी मिल गई, तो वह अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का अपना विचार छोड़ देंगी। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट द्वारा रिजेक्ट किए जाने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने का साहसी फैसला लिया।
अमेरिका में शिक्षा और शानदार प्रदर्शन भारत में नौकरी न मिलने के बाद प्रचीति ने रुकने के बजाय University of Massachusetts Amherst से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री पूरी की। उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया, बल्कि 4.0 GPA के साथ ग्रेजुएशन पूरा कर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। इससे पहले वह मुंबई के प्रसिद्ध VJTI कॉलेज से इंजीनियरिंग कर चुकी थीं।
सपनों के ऑफिस में मिली बड़ी कामयाबी मेहनत रंग लाई और मई 2026 में प्रचीति ने Microsoft के वॉशिंगटन स्थित हेडक्वार्टर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर पदभार संभाला। हाल ही में उन्होंने अपने माता-पिता को अपना ऑफिस दिखाया। अपने पोस्ट में उन्होंने भावुक होकर लिखा कि जब उन्होंने अपने माता-पिता के चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान देखी, तो उन्हें अपने सफलता के मायने समझ आ गए।
प्रेरणा का स्रोत बनी यह कहानी प्रचीति का यह सफर लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है। यह साबित करता है कि रिजेक्शन हमेशा असफलता नहीं होता, बल्कि कभी-कभी यह किसी बड़े अवसर की शुरुआत होती है। एक बंद दरवाजा वास्तव में आपके लिए बेहतर और बड़े भविष्य के रास्ते खोल सकता है। उनकी इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया पर लोग लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं।
It s crazy to think that I wouldn t be here if Microsoft India had not rejected me just before I came to US. (Long story short - my plan was to ditch my admit if I had gotten an offer in India)
— Prachiti (@PrachitiParkar) July 27, 2026
Last week, I took my parents to my workplace here in Washington and they were just in… pic.twitter.com/ZIYoRaXVeD
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