भारतीय न्यायपालिका और संसदीय इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो समय की धूल में धुंधले नहीं पड़ते। अशोक कुमार सेन (AK Sen) उन्हीं में से एक हैं। वे न केवल आजाद भारत के सबसे लंबे समय तक कानून मंत्री रहने वाले नेता रहे, बल्कि उनकी कानूनी प्रतिभा का लोहा नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक के प्रधानमंत्रियों ने माना। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने उनकी तस्वीर का अनावरण कर उन्हें नमन किया।
अशोक कुमार सेन का जन्म 1913 में बांग्लादेश के फरीदपुर में हुआ था। कानून की पढ़ाई लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ग्रेज़ इन से पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनके परिवार का कानूनी कद बहुत ऊंचा था, उनके छोटे भाई सुकुमार सेन स्वतंत्र भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिन्होंने देश में चुनावी प्रक्रिया की नींव रखी।
लंदन से लौटने के बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। मात्र पांच साल के भीतर वे वहां के सबसे चर्चित और सफल वकीलों में से एक बन गए। उनकी कानूनी समझ ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय को प्रभावित किया, जिनकी सिफारिश पर जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।
AK Sen की राजनीतिक यात्रा बेहद प्रभावशाली रही। 1957 में उन्होंने कम्युनिस्टों के गढ़ माने जाने वाले उत्तर-पश्चिम कोलकाता से चुनाव लड़ा और एक लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। वे लगातार चार लोकसभा चुनाव जीते और कुल पांच बार सांसद बने। 1957 से 1987 के बीच वे नेहरू, शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कानून मंत्री रहे।
उनकी सबसे बड़ी पहचान कानून मंत्रालय के साथ उनके लंबे कार्यकाल की रही। वे केवल कानून मंत्री ही नहीं रहे, बल्कि संचार, इस्पात और खान जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली। देश की न्याय व्यवस्था और संसदीय लोकतंत्र को आकार देने में उनकी भूमिका अद्वितीय रही। वे लगभग 10 वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट में आयोजित यह सम्मान समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह उनके उस योगदान को याद करने का जरिया था, जिसने भारतीय न्याय प्रणाली को मजबूती दी। सितंबर 1996 में उनके निधन के दशकों बाद भी AK Sen को याद किया जाना बताता है कि एक विधिवेत्ता के तौर पर उनकी विरासत आज भी कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणा है।
*#WATCH | The Chief Justice of India (CJI) Surya Kant and Senior Advocate Harish Salve unveiled a photograph in the memory of late Senior Advocate AK Sen on the ceremony of Late Senior Advocate A.K. Sen lecture and photograph unveiling ceremony organised by the Supreme Court Bar… pic.twitter.com/DqAgaTa5vw
— ANI (@ANI) July 29, 2026
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