पेपर लीक कानून पर आर-पार: सुप्रिया सुले ने की JPC की मांग, कहा- बिल में हैं खामियां
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नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और शिक्षा प्रणाली में व्याप्त धांधली को लेकर संसद में गहमागहमी तेज हो गई है। लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल पर बहस के दौरान एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

JPC और सर्वदलीय बैठक की मांग सुप्रिया सुले ने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा बिल में कई अंदरूनी कमियां हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन किया जाना चाहिए। सुले ने कहा, अगर सरकार वास्तव में सिस्टम को बचाना चाहती है, तो सभी स्टेकहोल्डर्स को बुलाकर एक ऐसा बिल लाया जाए जो पूरी तरह लीक-प्रूफ हो। उन्होंने इसके लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का भी सुझाव दिया।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक विस्तृत जांच की जरूरत बहस के दौरान सुले ने देश भर में पेपर लीक से प्रभावित हुए लाखों छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक, जहां भी छात्र प्रभावित हुए हैं, उन सभी घटनाओं की विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों जैसे पहलगाम हमले के समय देश एकजुट रहा था, उसी तरह छात्रों के भविष्य के लिए भी सरकार को एकजुटता दिखानी चाहिए।

सरकार पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप सुप्रिया सुले ने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि युवा उनके साथ हैं। उन्होंने कहा, युवा पीढ़ी किसके साथ है, यह 2029 के चुनावों में स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने छात्रों की मांगों को पूरी संवेदनशीलता के साथ हल करने की अपील की।

प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला इस बहस के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया? प्रियंका ने आरोप लगाया कि पिछले 10 सालों में पेपर लीक की 152 घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी बड़े माफिया को सजा नहीं मिली है।

उन्होंने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को RSS प्रचारकों से भरकर उसे खोखला करने का आरोप भी लगाया। फिलहाल, विपक्ष इन सवालों के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार अपनी नीतियों और कानून को दुरुस्त करने का दावा कर रही है।

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