PoK में चुनावी हिंसा: 19 लोगों की मौत, भारत ने चुनावों को बताया अवैध
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव से पहले भारी हिंसा भड़क गई है। चुनावी धांधली और सरकार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा बलों और जनता के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम 19 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

रावलाकोट में सेना की बर्बरता का आरोप जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का गंभीर आरोप लगाया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर मृतकों की सूची जारी करते हुए कहा कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर सेना ने बल प्रयोग किया। हिंसा के कारण तनाव चरम पर है।

भारत का कड़ा रुख: चुनाव अवैध भारत ने इन चुनावों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत का अभिन्न अंग होने के नाते जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान का कब्जा पूरी तरह अवैध है। मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए अपने अवैध कब्जे को वैधता देने और वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिश कर रहा है।

बातचीत विफल, सड़कों पर उतरे हजारों लोग तनाव की जड़ में JAAC की वे मांगें हैं, जिन्हें प्रशासन ने ठुकरा दिया। संगठन ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई और प्रशासनिक सुधार के लिए 27 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया था। मांगें पूरी न होने पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू कर दिया। हालात को देखते हुए सुधनोती और रावलाकोट जिलों में चुनाव 10 अगस्त तक टाल दिए गए हैं।

क्यों सुलग रहा है PoK? PoK में विरोध की आग लंबे समय से धधक रही है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही JAAC के नेताओं की गिरफ्तारी ने आग में घी का काम किया है। बीते पखवाड़े से जारी इस विरोध प्रदर्शन के कारण PoK के कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह ठप है। बैंक बंद हैं, इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं और जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

तीन चरणों में चुनाव की मजबूरी मूल रूप से 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 27 जुलाई को होने थे। लेकिन व्यापक विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण प्रशासन को चुनाव तीन चरणों में कराने का निर्णय लेना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार के पास अब किसी भी प्रशासनिक बदलाव के लिए संवैधानिक संशोधन का रास्ता ही बचा है, लेकिन जनता का बढ़ता गुस्सा वहां की सत्ता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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