चारधाम यात्रा पर दो दिनों का ब्रेक: भारी बारिश और भूस्खलन के चलते थम गईं श्रद्धालुओं की राहें
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उत्तराखंड में मानसून का कहर जारी है। लगातार हो रही भारी बारिश, पहाड़ों से गिरते मलबे और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को फिलहाल दो दिनों (मंगलवार और बुधवार) के लिए स्थगित कर दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है।

क्यों रोकी गई यात्रा? मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राज्य की प्रमुख नदियां—गंगा, अलकनंदा, भागीरथी, पिंडर, कोसी और यमुना उफान पर हैं। इसके अलावा, सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) ने उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने की चेतावनी दी है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती और रास्ते सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक यात्रा पर रोक जारी रहेगी।

इन जिलों पर सबसे ज्यादा संकट उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भारी बारिश और बिजली गिरने के खतरों को देखते हुए देहरादून, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और नदियों के किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी है।

रुद्रप्रयाग का टनल प्रोजेक्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान लगातार बारिश ने बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंचाई है। रुद्रप्रयाग में निर्माणाधीन 900 मीटर लंबी टनल के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहीं, देहरादून में नंदा की चौकी के पास हाल ही में बना पुल एप्रोच रोड बहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर के भीतर भी अलकनंदा नदी का पानी प्रवेश कर गया है, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है।

प्रशासन की अपील: अफवाहों से रहें सावधान गढ़वाल मंडल के आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यात्रा दोबारा शुरू करने का निर्णय मौसम और रास्तों की सुरक्षा की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें।

चारधाम में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री शामिल हैं। मानसून के दौरान पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जोखिम भरा होता है, इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे जिला प्रशासन की नवीनतम एडवाइजरी का नियमित रूप से पालन करें।

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