PoJK में उबाल: लॉन्ग मार्च पर फायरिंग और आंसू गैस, क्या है जनता के गुस्से की असली वजह?
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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में हालात बेकाबू हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के लॉन्ग मार्च के आह्वान के बाद सड़कों पर जनता और सुरक्षा बलों के बीच सीधी भिड़ंत देखने को मिल रही है।

क्या है लॉन्ग मार्च का मकसद? JKJAAC व्यापारियों, वकीलों, छात्रों और सामाजिक संगठनों का एक संयुक्त मंच है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रशासन ने पहले किए गए वादों को पूरा करने से इनकार कर दिया है। इसी के विरोध में मुजफ्फराबाद की ओर मार्च का ऐलान किया गया था, जिसे रोकने के लिए प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी थी।

फायरिंग और आंसू गैस से दहला इलाका प्रदर्शन के दौरान तनाव चरम पर पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने मार्च को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कई जगहों पर फायरिंग की। इस हिंसक टकराव में 30 से ज्यादा लोगों के घायल होने और करीब 5 लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इन आंकड़ों की पुष्टि की जानी बाकी है।

जनता की मांगें और सरकार की चुप्पी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें बिजली की दरों में भारी कटौती, आटे पर सब्सिडी, महंगाई पर नियंत्रण और वीआईपी कल्चर में कमी लाना है। जनता का आरोप है कि सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को दरकिनार कर रही है। अब तक हुई बातचीत के कई दौर बेनतीजा रहे हैं, जिससे आक्रोश और बढ़ गया है।

चुनाव टले, प्रशासन के सामने चुनौती बिगड़ते हालातों को देखते हुए सुधनौती और रावलकोट जिलों में 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव टाल दिए गए हैं। PoJK में इस समय पूरी तरह से प्रशासनिक और राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, संग्राम जारी रहेगा।

PoJK के लिए नया नहीं है विद्रोह PoJK में यह अशांति कोई नई बात नहीं है। 2024 में भी महंगाई और बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता सड़कों पर उतरी थी, जो हिंसक संघर्ष में बदल गई थी। उस वक्त मजबूरन सरकार को एक आर्थिक राहत पैकेज का ऐलान करना पड़ा था। अब देखना यह है कि क्या वर्तमान सरकार फिर से कोई समझौता करती है या टकराव और गहराएगा।

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