पिता की परचून दुकान से वर्ल्ड कप के मंच तक: वेटलिफ्टर बिंदियारानी की संघर्ष भरी जीत
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मणिपुर की बेटी सोरोखैबम बिंदियारानी देवी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया है। थाईलैंड के फुकेत में आयोजित IWF वर्ल्ड कप 2024 में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह जीत केवल एक मेडल नहीं, बल्कि गरीबी और तमाम बाधाओं को पार करने वाली एक प्रेरणादायक कहानी है।

साधारण परिवार से निकला असाधारण हौसला बिंदियारानी का जीवन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता है। उनके पिता एक किसान हैं और घर का खर्च चलाने के लिए एक छोटी सी परचून (किराना) की दुकान चलाते हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों और अभावों के बीच पली-बढ़ी बिंदियारानी ने हार मानने के बजाय अपने सपनों को प्राथमिकता दी। बचपन में ताईक्वांडो से खेल की शुरुआत करने वाली बिंदियारानी को 2013 में वेटलिफ्टिंग की ओर मोड़ा गया, जो उनके करियर का सबसे सही फैसला साबित हुआ।

चोट और सामाजिक अशांति से संघर्ष बिंदियारानी का सफर फूलों की सेज नहीं था। अपने करियर के दौरान उन्हें बार-बार गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। घुटने की इंजरी और उसके बाद रिहैबिलिटेशन के लंबे दौर ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया था। इसके अलावा, मणिपुर में फैली अशांति और हिंसा के माहौल ने भी उनके परिवार को मानसिक तनाव दिया। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी एकाग्रता को भंग नहीं होने दिया और पूरी तरह से अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखा।

करियर के दो बड़े टर्निंग प्वाइंट बिंदियारानी की सफलता में दो बड़े बदलावों का विशेष योगदान रहा। पहला, इम्फाल के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सलेंस (NCOE) में चयन और फिर 2019 में पटियाला स्थित SAI के राष्ट्रीय शिविर में प्रवेश, जिसने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक नई दिशा दी। दूसरा, उनका 55 किग्रा से 58 किग्रा भार वर्ग में शिफ्ट होने का निर्णय। इस बदलाव ने उन्हें नई ताकत दी और वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और भी अधिक प्रभावी साबित हुईं।

ऐतिहासिक उपलब्धियां बिंदियारानी की झोली में कई बड़ी उपलब्धियां हैं। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में रजत पदक हो या ताशकंद में विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में जीता गया क्लीन एंड जर्क का स्वर्ण पदक—उन्होंने हर स्तर पर खुद को साबित किया है। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में क्लीन एवं जर्क में 116 किग्रा वजन उठाकर उन्होंने राष्ट्रीय और कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। आज उनकी यह निरंतरता और मेहनत लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है।

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