छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव अब तक अपनी हॉकी नर्सरी के लिए मशहूर था, लेकिन अब इस शहर को 23 साल की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव के नाम से नई पहचान मिली है। ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ज्ञानेश्वरी ने 53 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया है।
गरीबी और संघर्ष से सिल्वर तक का सफर ज्ञानेश्वरी की यह जीत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके पिता दीपक यादव, जो कभी अविभाजित मध्य प्रदेश के नामचीन पहलवान थे, को परिवार चलाने के लिए इलेक्ट्रिशियन का काम करना पड़ा। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि सात से दस हजार रुपये की मासिक आय में स्पोर्ट्स किट और डाइट का खर्च उठाना नामुमकिन सा था।
साइकिल पर सवार होकर तय की मंजिल संघर्ष के दिनों में पिता अपनी बेटी को रोज आठ किलोमीटर साइकिल चलाकर भोड़िया गांव से राजनांदगांव ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे। ज्ञानेश्वरी ने उसी जय भवानी व्यायामशाला में भारोत्तोलन की बारीकियां सीखीं, जहां उनके पिता कभी खुद बॉडी बिल्डिंग किया करते थे। आज उन्हीं पिता की आंखों में अपनी बेटी की उपलब्धि को देखकर गर्व के आंसू हैं।
पर्सनल बेस्ट के साथ शानदार प्रदर्शन कॉमनवेल्थ गेम्स के अपने पहले ही मुकाबले में ज्ञानेश्वरी ने गजब का संयम दिखाया। उन्होंने स्नैच राउंड में 88 किलो और क्लीन एंड जर्क में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) करते हुए 111 किलो वजन उठाया। कुल स्कोर के साथ उन्होंने रजत पदक पर अपना कब्जा जमा लिया।
2017 बना करियर का टर्निंग पॉइंट ज्ञानेश्वरी के लिए साल 2017 एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब उन्होंने दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय इवेंट में अपना पहला कांस्य पदक जीता। इसके बाद 2022 में भुवनेश्वर में जूनियर स्वर्ण पदक और फिर कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर उन्होंने दिखा दिया कि वे मीराबाई चानू की राह पर चलने के लिए तैयार हैं।
भारत की नई उम्मीद पटियाला के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान में प्रशिक्षण ले रहीं ज्ञानेश्वरी अब लोअर वेट कैटेगरी में देश का बड़ा नाम बन चुकी हैं। उनकी यह जीत न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अभावों के बीच रहकर भी आसमान छूने का सपना देखते हैं।
*Commonwealth Games 2026: Weightlifter Gyaneshwari Yadav clinches a silver medal in the women s 53kg category.
— IANS (@ians_india) July 27, 2026
Gyaneshwari Yadav says, I am feeling extremely happy. This is my first Commonwealth Games, and my motive was to give my personal best, and I did that... pic.twitter.com/XuQtP1G6xN
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