विपक्ष का 2029 तक का मास्टर प्लान : बीजेपी को घेरने के लिए बुने गए पांच घातक चक्रव्यूह
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नई दिल्ली: नीट पेपर लीक-2026 मामले ने मोदी सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष इस मुद्दे को केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव तक खींचकर बीजेपी को फंसाने की एक सोची-समझी रणनीति पर काम कर रहा है।

CJP का आंदोलन: विपक्ष के लिए संजीवनी नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने विपक्ष को नई ऊर्जा दी है। इस प्रदर्शन में जेन-जी (Gen-Z) युवाओं की भारी भागीदारी ने विपक्ष को वह जनाधार दिया है, जिसकी उन्हें लंबे समय से तलाश थी। कांग्रेस और सपा जैसे दलों ने इस मौके को भुनाने में देर नहीं की। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष अब इस लड़ाई को कानूनी और जमीनी, दोनों मोर्चों पर मजबूती से लड़ने की तैयारी में है।

विपक्ष की पांच सूत्रीय रणनीति विपक्ष ने बीजेपी को घेरने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है:

  1. बेरोजगारी और पेपर लीक: युवाओं के भविष्य से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों को लगातार सुर्खियों में बनाए रखना।
  2. विदेश नीति पर प्रहार: चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में जमीन कब्जाने और बांग्लादेश जैसे मुद्दों पर सरकार को डिफेंसिव मोड में लाना।
  3. महंगाई और आम आदमी: पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E-20) के इंजन पर दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों को उठाकर आम जनता के बीच सरकार की छवि विकास विरोधी के रूप में पेश करना।
  4. विवादास्पद परियोजनाएं: ग्रेट निकोबार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठाकर सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर संदेह पैदा करना।
  5. जवाबदेही का दबाव: गृह मंत्री अमित शाह और अन्य मंत्रियों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करना।

संसद से सड़क और सुप्रीम कोर्ट तक जंग विरोध अब केवल सड़क तक सीमित नहीं है। आरजेडी सांसद मनोज झा ने नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता इस मुद्दे को तानाशाही के खात्मे से जोड़कर सरकार को वैचारिक चुनौती दे रहे हैं।

अभी तो यह सिर्फ ट्रेलर है सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने स्पष्ट कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ एक शुरुआत है। विपक्षी खेमा अब जवाबदेही को अपना मुख्य हथियार बना चुका है। राहुल गांधी का तीखा हमला कि छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? , इसी रणनीति का हिस्सा है। वहीं, ममता बनर्जी जैसे दिग्गज नेता प्रधानमंत्री के हर कदम को संदेह के घेरे में रखकर सरकार के मनोबल को लगातार तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

स्पष्ट है कि विपक्ष ने बीजेपी के लिए वह चक्रव्यूह तैयार कर लिया है, जिससे बाहर निकलना आने वाले वर्षों में मोदी सरकार के लिए आसान नहीं होने वाला है।

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