NEET परीक्षा में हुए ऐतिहासिक पेपर लीक और देशव्यापी विरोध के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपना लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2027 से NEET के ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए सरकार द्वारा गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों की बारीकी से जांच की जाएगी। इस बार मकसद ऐसे अभूतपूर्व समाधान खोजना है, जो पेपर लीक करने वाले गिरोहों की कमर तोड़ दें।
नीलेकणि का चक्रव्यूह : दिग्गज टीम संभाल रही कमान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गठित इस सुपर-पैनल का नेतृत्व टेक्नोलॉजी के दिग्गज नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इस टीम में ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामकोटि और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा जैसे दिग्गज शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह टीम अपने अनुभव और विशेषज्ञता के कारण बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या 2027 से बदलेगा NEET का चेहरा? सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि पारंपरिक पेन-एंड-पेपर परीक्षा से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) तक का सफर आसान नहीं है। इसके लिए केवल तकनीक नहीं, बल्कि एक मजबूत साइबर सुरक्षा और डेटाबेस प्रोटेक्शन कवच की जरूरत है। कोर्ट ने कहा है कि वह नीलेकणि टास्क फोर्स की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि भविष्य में धांधली की किसी भी गुंजाइश को खत्म किया जा सके।
राधाकृष्णन कमेटी का हाइब्रिड मॉडल पेपर लीक रोकने के लिए राधाकृष्णन कमेटी ने एक क्रांतिकारी हाइब्रिड परीक्षा मॉडल का सुझाव दिया है। इस मॉडल के तहत प्रश्न-पत्र पूरी तरह एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्मेट में रहेंगे और इन्हें परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले स्थानीय केंद्रों पर प्रिंट किया जाएगा। इससे पेपर लीक होने का जोखिम लगभग शून्य हो जाएगा। साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए भी बड़े सुधारों पर काम चल रहा है।
संसदीय कमेटी का बड़ा सुझाव: कई चरणों में हो परीक्षा? मामले की समीक्षा कर रही संसदीय कमेटी ने परीक्षा के तरीकों को लेकर चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि लॉजिस्टिकल चुनौतियों को कम करने के लिए NEET को कई चरणों में आयोजित किया जाए और मेडिकल स्ट्रीम के अनुसार अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं ली जाएं। हालांकि, इसके लिए देश में एक बेहद आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना एक बड़ी चुनौती है।
3 अगस्त का सस्पेंस: अगली सुनवाई पर सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट अब RJD सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका पर 3 अगस्त को सुनवाई करेगा। यह याचिका 3 मई को रद्द हुई NEET-UG परीक्षा और उसके बाद की प्रक्रिया को लेकर है। गौरतलब है कि CBI इस मामले में अभी तक 13 लोगों को हिरासत में लेकर जांच कर रही है। 22 लाख छात्रों का भविष्य और देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की साख दांव पर है, ऐसे में 3 अगस्त की सुनवाई शिक्षा व्यवस्था में नए युग की शुरुआत कर सकती है।
Supreme Court -
— News Arena India (@NewsArenaIndia) July 27, 2026
“Will see what Nilekani-led task force suggests on online NEET exam.
We need some additional safeguards with respect to cyber security, database protection.” pic.twitter.com/2UQ0jat4LN
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