21 में बन सकते हैं अफसर तो विधायक-सांसद क्यों नहीं? रेवंत रेड्डी की केंद्र को खुली चुनौती
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नई दिल्ली: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने राजनीति में युवाओं की भागीदारी को लेकर एक बड़ा विमर्श छेड़ दिया है। दिल्ली में छात्रों के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र को 25 से घटाकर 21 साल करने की पुरजोर वकालत की है।

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि तेलंगाना सरकार अगस्त की शुरुआत में विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाएगी। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य चुनाव लड़ने की उम्र सीमा कम करने के प्रस्ताव को पारित कर केंद्र सरकार को भेजना है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक संवैधानिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम होगा।

क्यों है 21 साल का तर्क? मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब 21 साल की उम्र में कोई युवा आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी बन सकता है या मेयर और स्थानीय निकाय का प्रतिनिधि चुना जा सकता है, तो फिर विधायक या सांसद बनने से क्यों रोका जाता है? उन्होंने कहा कि युवाओं को सीधे नीति-निर्धारक बनने का मौका मिलना चाहिए, जैसा कि ब्रिटेन, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों में देखा जाता है।

NEET छात्रों पर दर्ज मामले वापस ले केंद्र रेवंत रेड्डी ने नीट (NEET) विवाद पर भी केंद्र को घेरा। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के आगे सरकार का झुकना लोकतंत्र की जीत है, लेकिन अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिए जाएं।

पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग परीक्षाओं में अनियमिताओं और तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को लेकर भी रेड्डी भावुक दिखे। उन्होंने केंद्र के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी ने भी उन दुखी परिवारों से मुलाकात नहीं की। उन्होंने राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल से संसद में इन पीड़ित परिवारों के लिए उचित आर्थिक मुआवजे की मांग को मजबूती से उठाने की अपील की है।

इंडिया गठबंधन से मिलेगी मदद? मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि वे इस मुद्दे पर केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं रहेंगे। वे इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं से भी बातचीत करेंगे ताकि चुनावी उम्र घटाने के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सहमति बनाई जा सके। उन्होंने छात्र नेताओं से अपील की कि वे अपनी आवाज संसद तक पहुंचाएं ताकि भविष्य के नीति-निर्माता देश की दिशा तय कर सकें।

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