नंदन नीलेकणी के हाथों में परीक्षा सुधार की कमान: पीएम मोदी ने बनाई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव और उसकी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस महत्वपूर्ण समिति की कमान टेक दिग्गज और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है।

टास्क फोर्स के पीछे का उद्देश्य

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि सरकार परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। इस टास्क फोर्स का मुख्य काम परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है। सरकार का लक्ष्य भविष्य की परीक्षाओं को तकनीक के माध्यम से सुरक्षित करना है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

कौन-कौन है इस विशेष टीम में?

इस बहु-विषयक (Multidisciplinary) टीम में तकनीक, अंतरिक्ष, खुफिया और शिक्षा क्षेत्र के दिग्गजों को शामिल किया गया है:

नंदन नीलेकणी: तकनीक और प्रशासन का अनुभव

नंदन नीलेकणी को भारत में तकनीकी क्रांति और सुशासन का बड़ा चेहरा माना जाता है। यूपीए सरकार के दौरान आधार परियोजना को सफलतापूर्वक लागू करने का श्रेय उन्हें ही जाता है। अब सरकार उम्मीद कर रही है कि उनका वही तकनीकी अनुभव देश की लचर परीक्षा प्रणाली में सुधार लाएगा।

विपक्ष का हमला: छवि सुधारने की कवायद

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस गठन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 2024 में गठित के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशें अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नई टास्क फोर्स केवल प्रधानमंत्री की प्रभावित छवि को सुधारने का एक हाई-पावर्ड प्रयास मात्र है।

गहराता संकट और सरकार पर दबाव

हाल के महीनों में नीट-यूजी समेत कई परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने देशभर के युवाओं में आक्रोश भर दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक समेत कई शिक्षाविदों और छात्रों का लंबे समय तक चला आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना था। इसके चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक उठी और संसद में भी भारी हंगामा हुआ।

अब देखना यह होगा कि नीलेकणी की अध्यक्षता वाली यह समिति कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट पेश करती है और सरकार उन सिफारिशों को जमीन पर उतारने में कितनी तत्परता दिखाती है।

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