पेपर लीक पर पीएम की रील्स vs छात्रों का गुस्सा: CJP की दो टूक - इस्तीफा दीजिए, फिर शेयर करेंगे वीडियो
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नई दिल्ली: नीट (NEET) और पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। पिछले 48 घंटों में पीएम ने दो वीडियो (रील्स) साझा कर पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

युवाओं तक पहुंचने की रणनीति? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का इंस्टाग्राम पर सक्रिय होना युवाओं के बढ़ते असंतोष को शांत करने की एक कोशिश है। सरकार का संदेश साफ है—वे छात्रों के भविष्य के प्रति चिंतित हैं और कड़े कानूनों के जरिए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

CJP का तीखा हमला: रील्स नहीं, इस्तीफा चाहिए प्रधानमंत्री की इस पहल पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने तंज कसते हुए कहा, अगर पीएम रात में रील्स बना रहे हैं, तो साफ है कि सिस्टम में बड़ी गड़बड़ी है। उन्हें अहसास हो गया है कि युवाओं में गुस्सा उबल रहा है।

रांका ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि रील्स बनाने से पहले सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, आप सख्त एक्शन लेने की बात करते हैं, तो पहले उसे जमीन पर उतारिए। इस मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे बड़ी कार्रवाई होगी। जिस दिन आप यह करेंगे, हम भी आपकी रील्स शेयर करेंगे।

क्या रील्स से बुझेगी छात्रों की नाराजगी? गुरुवार आधी रात और फिर शुक्रवार रात को जारी पीएम के वीडियो संदेशों में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने का वादा किया गया। पीएम ने जनता के सुझावों के लिए आभार भी जताया है। हालांकि, विपक्षी दल और छात्र संगठन इसे नाकाफी बता रहे हैं।

CJP का कहना है कि सोशल मीडिया पर संवाद बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन केवल डिजिटल संदेशों से छात्रों का विश्वास बहाल नहीं होगा। छात्र अब जमीनी स्तर पर जवाबदेही और शिक्षा मंत्री की विदाई से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

आंदोलन जारी रहेगा एक तरफ सरकार डिजिटल संवाद के जरिए स्थिति को संभालने में जुटी है, तो दूसरी तरफ CJP और अन्य छात्र संगठन अपनी मांगों पर अड़े हैं। पार्टी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि उनके नेता के बीमार होने के बावजूद आंदोलन की धार कम नहीं होगी। अब देखना यह है कि सरकार इस डिजिटल संवाद के आगे क्या ठोस कदम उठाती है।

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