सोनम वांगचुक के बचाव में उतरी CJP: सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा- अब सिर्फ हां या ना में जवाब चाहिए
News Image

सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। विपक्ष और सोशल मीडिया पर वांगचुक के इस फैसले को डील और अन्ना आंदोलन पार्ट-2 करार दिया जा रहा है। इन तमाम आलोचनाओं के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पहली बार खुलकर अपना रुख स्पष्ट किया है।

सोनम वांगचुक पर सवाल उठाना घटिया है: CJP

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने वांगचुक को निशाना बनाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, जिस व्यक्ति ने छात्रों के भविष्य और देश के हितों के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी, उन पर सवाल उठाना बेहद दुखद और घटिया है।

रांका ने स्पष्ट किया कि वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करने से पहले सरकार से यह सुनिश्चित कराया है कि आंदोलनरत छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई न हो और उन्हें उचित मुआवजा भी मिले। उन्होंने वांगचुक को एक निस्वार्थ आंदोलनकारी बताते हुए विपक्ष के डील वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

कांग्रेस के अन्ना पार्ट-2 वाले दावे पर पलटवार

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा इस आंदोलन की तुलना अन्ना आंदोलन और पर्सनल डील से करने पर CJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस की सोच पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है, लेकिन यह सच है कि वांगचुक ने व्यक्तिगत फायदे के बजाय छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार को डेडलाइन

CJP ने अब नीट (NEET) मामले पर अपना दबाव और बढ़ा दिया है। सरकार के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले आशुतोष रांका ने दो टूक कहा कि अब गोलमोल बातों का समय खत्म हो चुका है। संगठन की मुख्य मांग अब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

रांका ने चुनौती देते हुए कहा, सरकार अब हमें घुमा-फिराकर जवाब न दे। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं, हमें केवल हां या ना में स्पष्ट जवाब चाहिए।

आंदोलन की अगली रणनीति क्या?

CJP का मानना है कि सरकार द्वारा NTA के 47 अधिकारियों पर की गई हालिया कार्रवाई नाकाफी है। संगठन का तर्क है कि पेपर लीक के लिए केवल अधिकारी नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार का रवैया टालमटोल वाला रहा और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो छात्र संगठन भविष्य में और भी उग्र कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इस गतिरोध को कैसे समाप्त करती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

भव्य रसायन स्कीम: केमिकल सेक्टर में क्रांति की तैयारी, मोदी सरकार ने मंजूर किए 3030 करोड़

Story 1

69000 शिक्षक भर्ती: नियुक्ति की आस में मायावती के आवास पहुंचे अभ्यर्थी, पुलिस ने खदेड़ा

Story 1

असम और गुजरात में कुदरत का तांडव: बाढ़ से 93 मौतें, 7 लाख से ज्यादा लोग बेघर

Story 1

दिल्ली पुलिस का खुलासा: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की आड़ में पाकिस्तान चला रहा 400+ फेक अकाउंट्स का नेटवर्क

Story 1

क्या 26 दिन के अनशन के बाद भी साबित करनी होगी नीयत? डील के आरोपों पर सोनम वांगचुक का करारा जवाब

Story 1

ब्लैक सी में भारतीय नाविक की मौत: व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों से भारत सख्त, जताई कड़ी चिंता

Story 1

UN की दिल्ली छात्र आंदोलन पर दो टूक: शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, सुरक्षा बल बरतें संयम

Story 1

मौसम का रेड अलर्ट : दिल्ली-यूपी समेत 15 राज्यों में आंधी-तूफान और भारी बारिश का खतरा, 70 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

Story 1

मिडिल ईस्ट में सी-वॉर : अमेरिकी हमले से दहला ईरान, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

Story 1

बलिया का 52 बीघा पोखरा विवाद: अवैध कब्जे पर कार्रवाई न होने से गरमाया मामला, मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत