नई दिल्ली में फूड डिलीवरी पर बैन : आखिर क्या है सच्चाई?
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नई दिल्ली इलाके में फूड डिलीवरी ऐप पर प्रतिबंध की खबर ने बुधवार को सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच यह दावा तेजी से फैला कि पुलिस ने डिलीवरी सेवाओं को पूरी तरह रोक दिया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस खबर का खंडन करते हुए इसे पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है।

कैसे पैदा हुआ भ्रम? दरअसल, यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को भेजे जा रहे भारी मात्रा में खाने के पैकेट से शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने उन रेस्तरां की पहचान की, जो प्रदर्शन स्थल पर भोजन उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस ने रेस्तरां संचालकों से पूछताछ की और उनसे डिलीवरी के रिकॉर्ड मांगे। कुछ दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें भविष्य में प्रदर्शन स्थल पर मुफ्त भोजन न भेजने की सलाह दी गई, जिससे यह अफवाह उड़ी कि फूड डिलीवरी पर ही बैन लगा दिया गया है।

ट्रैफिक एडवाइजरी ने बढ़ाई उलझन भ्रम तब और बढ़ गया जब दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया था कि धारा 163 बीएनएसएस के तहत निषेधाज्ञा वाले क्षेत्रों में फूड डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अपने संचालन को परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित करें। लोगों ने इस निर्देश को पूर्ण प्रतिबंध समझ लिया और सोशल मीडिया पर इसे वायरल करना शुरू कर दिया।

पुलिस ने जारी किया फेक न्यूज अलर्ट अफवाहों के जोर पकड़ते ही दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस ने साफ किया, दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली क्षेत्र में फूड डिलीवरी सेवाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी बयानों को ही सही मानें।

वर्तमान स्थिति क्या है? आधिकारिक तौर पर नई दिल्ली में फूड डिलीवरी पर कोई सामान्य बैन नहीं है। हालांकि, जहां धारा 163 लागू है या सुरक्षा कारणों से पुलिस ने बैरिकेडिंग की है, वहां डिलीवरी एजेंटों की आवाजाही में अस्थायी रुकावटें हो सकती हैं। यह एक सुरक्षात्मक कदम है, न कि कोई औपचारिक प्रतिबंध।

संक्षेप में कहें तो, सुरक्षा के लिए लगाए गए स्थानीय नियंत्रण को सोशल मीडिया पर डिलीवरी बैन के रूप में पेश किया गया, जिसने पूरे मामले को अनावश्यक रूप से विवादित बना दिया।

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