ऑफिस में शॉर्ट्स बनाम पैरों के बाल: जापान में क्यों छिड़ी लेग हेयर हैरेसमेंट की नई बहस?
News Image

जापान इन दिनों भीषण गर्मी का सामना कर रहा है, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। बिजली और ऊर्जा बचाने के लिए टोक्यो प्रशासन ने दफ्तरों में कूल बिज अभियान के तहत पुरुष कर्मचारियों को शॉर्ट्स पहनकर आने की अनुमति दी है। हालांकि, यह राहत की पहल अब एक अजीबोगरीब विवाद में बदल गई है।

लेग हेयर हैरेसमेंट का नया शोर पुरुषों के शॉर्ट्स पहनकर ऑफिस आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ महिला कर्मचारियों ने दफ्तर में पुरुषों के घने पैरों के बाल देखकर असहज होने की बात कही है। इसे सोशल मीडिया पर सुनेहारा यानी लेग हेयर हैरेसमेंट का नाम दिया गया है। हालांकि यह कोई कानूनी मानक नहीं है, लेकिन इसने दफ्तर के माहौल पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

असमान ड्रेस कोड पर उठा सवाल इस विवाद ने जेंडर इक्वालिटी के मुद्दे को भी हवा दी है। महिलाओं का तर्क है कि अगर पुरुषों को गर्मी के कारण शॉर्ट्स पहनने की छूट दी जा सकती है, तो महिलाओं के लिए दफ्तरों में ड्रेस कोड आज भी इतने सख्त क्यों हैं? कई जगहों पर महिलाओं को आज भी स्टॉकिंग्स, एड़ी वाले जूते और मेकअप के सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। महिला कर्मचारियों का कहना है कि नियम लैंगिक आधार पर नहीं, बल्कि सभी के लिए समान और आरामदायक होने चाहिए।

क्या शॉर्ट्स का मतलब अनप्रोफेशनल है? एक सर्वे के अनुसार, जापानी समाज इस मामले में दो हिस्सों में बंटा है। करीब 53.5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि शॉर्ट्स पहनने से ऑफिस की गरिमा और प्रोफेशनल माहौल प्रभावित होता है। वहीं, 46.5 प्रतिशत का कहना है कि भीषण गर्मी में कपड़ों की आजादी अनिवार्य है और काम की गुणवत्ता का कपड़ों से कोई लेना-देना नहीं है।

ग्रूमिंग की ओर भागते पुरुष इस विवाद के चलते जापान में एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। दफ्तरों में शॉर्ट्स पहनने के दबाव और आलोचनाओं के बीच, कई पुरुष अब लेजर हेयर रिमूवल का सहारा ले रहे हैं। ब्यूटी क्लीनिकों में ऐसे पुरुष ग्राहकों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो ऑफिस में साफ-सुथरे दिखने के लिए पैरों के बाल हटवा रहे हैं।

बदलते वर्क कल्चर की नई चुनौती यह बहस केवल फैशन तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलती जलवायु और वर्क कल्चर का आईना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे-जैसे दुनिया में गर्मी बढ़ रही है, कंपनियों को अपने दशकों पुराने ड्रेस कोड पर पुनर्विचार करना होगा। क्या कंपनियां अब ड्रेस कोड के साथ ग्रूमिंग गाइडलाइन्स भी जारी करेंगी? यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल जापानी दफ्तरों में यह मुद्दा हॉट टॉपिक बना हुआ है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सब्जी बेचने और रिक्शा चलाने से कॉमनवेल्थ पोडियम तक: झंडू कुमार के संघर्ष की जादुई कहानी

Story 1

शेरों के बीच बेखौफ घूमता दिखा साधु! इंटरनेट पर छिड़ी चमत्कार बनाम एडिटिंग की जंग

Story 1

क्या 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया में होगी दीवारों की वापसी? इन 3 दिग्गजों पर टिकी नजरें

Story 1

मीरजापुर कचहरी में बवाल: हिंदू युवती से शादी करने पहुंचे युवक की वकीलों ने की पिटाई, वीडियो वायरल

Story 1

असम और गुजरात में कुदरत का तांडव: बाढ़ से 93 मौतें, 7 लाख से ज्यादा लोग बेघर

Story 1

इंस्टा पर PM मोदी का थैंक यू : Gen Z के साथ संवाद और पेपर लीक पर कड़ा रुख

Story 1

वेस्टइंडीज क्रिकेट में भूचाल: स्टार गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से किया इनकार

Story 1

बच्चों को सिर्फ आदेश नहीं, तर्क चाहिए: छात्र आंदोलन के बीच मोहन भागवत का बड़ा संदेश

Story 1

बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर: तेज प्रताप ने आरजेडी को छोड़ प्रशांत किशोर को दिया समर्थन

Story 1

धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी? राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बोला तीखा हमला