गुजरात इस वक्त भारी बारिश और भयावह बाढ़ की चपेट में है। राज्य के कई इलाकों में कुछ ही घंटों में 424mm से 552mm तक बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं और सड़कें तालाब बन चुकी हैं। इस तबाही के बीच मौसम वैज्ञानिकों के बीच एक नया नाम चर्चा का केंद्र बना है— पैसिफिक डिकेडल ऑसीलेशन (PDO)।
आखिर क्या है यह PDO? PDO प्रशांत महासागर के सतही तापमान में आने वाला एक दीर्घकालिक बदलाव है। अल-नीनो या ला-नीना का असर जहां कुछ महीनों का होता है, वहीं PDO का प्रभाव 20 से 30 साल तक बना रह सकता है। वर्तमान में यह नेगेटिव फेज में है, जिसे दुनिया भर के मौसम तंत्रों के लिए एक बड़ा गेम चेंजर माना जा रहा है।
कैसे मॉनसून को आक्रामक बना रहा है PDO? नेगेटिव PDO के दौरान भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं असामान्य रूप से सक्रिय हो जाती हैं। अरब सागर और हिंद महासागर से भारी मात्रा में नमी सीधे गुजरात और पश्चिमी भारत की ओर धकेल दी जाती है। यह अतिरिक्त नमी मॉनसून सिस्टम को एक सुपरचार्ज देती है, जिससे कम समय में अत्यधिक बारिश यानी क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं।
क्यों फेल हुए मौसम के पूर्वानुमान? हमारे अधिकांश पारंपरिक मौसम मॉडल अल-नीनो और ला-नीना जैसे कम अवधि वाले कारकों पर अधिक निर्भर हैं। PDO जैसे दशकों तक चलने वाले पैटर्न को मॉडलों में उतनी अहमियत नहीं दी गई। यही कारण है कि शुरूआती आकलनों में कम बारिश की उम्मीद थी, जबकि हकीकत में गुजरात रिकॉर्ड तोड़ बारिश का सामना कर रहा है।
बदलती जलवायु और खतरे का सबक गुजरात की बाढ़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए हमें अपनी सोच बदलनी होगी। अब सिर्फ अल-नीनो या ला-नीना पर नजर रखना काफी नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहतर आपदा तैयारियों के लिए PDO और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) जैसे बड़े जलवायु संकेतकों को मौसम पूर्वानुमान का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा।
निष्कर्ष मौसम विज्ञान अब पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुका है। गुजरात की हालिया आपदा एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में हमें स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के साथ-साथ वैश्विक समुद्री पैटर्न को भी बारीकी से समझना होगा। प्रभावी आपदा प्रबंधन और सटीक भविष्यवाणी के लिए यह नई वैज्ञानिक समझ ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
#WATCH | Surendranagar, Gujarat | Flood-like conditions developed in Olak village of Lakhtar tehsil due to heavy rainfall.
— ANI (@ANI) July 24, 2026
The district administration, police, and fire department jointly carried out a rescue operation and safely evacuated 27 people.
(Source: Information… pic.twitter.com/oIpQkshiiY
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