विवादों में शिक्षा मंत्रालय: नरेश पाल गंगवार की नियुक्ति पर मचा सियासी घमासान, 1.16 करोड़ की सब्सिडी का क्या है कनेक्शन?
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NEET पेपर लीक मामले के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने राजस्थान कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया है। लेकिन, इस नियुक्ति के तुरंत बाद से ही यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है 1.16 करोड़ की सब्सिडी का पूरा मामला?

विपक्षी दलों ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंगवार की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की सब्सिडी योजना के तहत नरेश पाल गंगवार के परिवार—उनकी पत्नी, बेटे और मां—को पांच वर्षों में कुल 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली थी। यह सब्सिडी जयपुर में खीरा उत्पादन से जुड़ी तीन अलग-अलग परियोजनाओं के लिए दी गई थी। विवाद इस बात पर है कि जिस समय यह सब्सिडी ली गई, उस दौरान गंगवार केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे, जिससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोप लग रहे हैं।

विपक्ष का हमला: मोदी का नया हीरा, खीरा चोर है

इस नियुक्ति के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, मोदी का नया हीरा तो खीरा चोर है। मोदी जी आपके दिमाग पर भ्रष्टाचार का कैसा भूत सवार हो गया है? मंदिर से लेकर शिक्षा के मंदिर तक हर जगह चोर बिठा रहे हो।

कांग्रेस का कड़ा प्रहार: ईमानदार चेहरों की कमी

कांग्रेस ने भी तंज कसते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास अब बचाव के लिए ईमानदार चेहरों की कमी पड़ गई है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि शिक्षा सचिव विनीत जोशी को बचाने के लिए सरकार ने उनकी जगह एक ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया है, जो खुद सवालों के घेरे में हैं।

सरकार के सामने सफाई की चुनौती

NEET जैसी संवेदनशील परीक्षाओं को लेकर पहले से ही शिक्षा मंत्रालय सवालों के घेरे में है। ऐसे में, एक ऐसे अधिकारी की नियुक्ति जिस पर पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हों, सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है। विपक्ष अब सरकार से इस नियुक्ति के आधार और पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग कर रहा है। केंद्र की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।

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