अमेरिकी हमलों से थर्राया ईरान, ट्रंप का दो-टूक ऐलान: जहाजों के नुकसान की भरपाई ईरानी संपत्ति से होगी
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मिडिल ईस्ट में तनाव अब युद्ध की दहलीज पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि गुरुवार शाम से शुरू हुए इन हमलों का लक्ष्य रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की उन गतिविधियों को रोकना है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं।

ईरानी संपत्ति से वसूला जाएगा हर्जाना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष को एक नया आर्थिक मोड़ दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि लाल सागर में जहाजों को होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई अमेरिका के पास मौजूद ईरानी संपत्तियों को जब्त करके की जाएगी। ट्रंप के अनुसार, यह कदम पूरी तरह न्यायोचित है क्योंकि ईरान द्वारा प्रायोजित हमलों के कारण कार्गो और वाणिज्यिक जहाजों को भारी आर्थिक चोट पहुंची है।

नौसैनिक नाकाबंदी का असर पिछले 9 दिनों से जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के ठोस परिणाम दिखने लगे हैं। इस दौरान अमेरिका ने 12 वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित निकाला और रास्ता बदला है, जबकि एक संदिग्ध जहाज को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों से होने वाली हथियारों की तस्करी और प्रतिबंधित सामग्री की सप्लाई को जड़ से खत्म करना है।

परमाणु कार्यक्रम पर जीरो टॉलरेंस राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के परमाणु मंसूबों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने दो-टूक कहा कि उनके प्रशासन के रहते ईरान कभी भी परमाणु क्षमता हासिल नहीं कर पाएगा। ट्रंप का मानना है कि पिछली सरकारों की ढिलाई के कारण ईरान को शह मिली थी, लेकिन अब अमेरिका इस मुद्दे को स्थायी रूप से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हूती विद्रोहियों को बड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर किए गए हालिया हमलों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि हूती विद्रोही अगर अपनी हरकतों से बाज नहीं आते, तो उन्हें और उनके आकाओं (ईरान) को भयानक सैन्य परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिका ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह हूतियों के कृत्यों के लिए सीधा ईरान को जिम्मेदार ठहराएगा।

तेल बाजार में खलबली लगातार 13वीं रात हुई बमबारी ने होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इस अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।

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