छात्रों से बातचीत में सरकार का अहंकार क्यों? कपिल सिब्बल का केंद्र पर तीखा हमला
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राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए छात्रों के साथ बातचीत न करने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने सरकार से पूछा है कि आखिर वे छात्रों से एक न्यूट्रल (तटस्थ) जगह पर मिलने में क्यों हिचकिचा रहे हैं।

इतना घमंड ठीक नहीं सिब्बल ने कहा कि छात्र बातचीत के लिए तैयार हैं और सरकार भी सार्वजनिक तौर पर यही दावा कर रही है। बावजूद इसके, गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली बार जब छात्र सरकार के पास गए थे, तो उन्हें घंटों इंतजार करने के बाद मुलाकात नसीब हुई थी। सिब्बल ने दो टूक कहा कि केंद्र सरकार को इतना अहंकार नहीं पालना चाहिए।

स्थिति बिगाड़ने का आरोप सिब्बल ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, जहाँ सुझावों की जरूरत है, वहां आप स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं। जहां समझौता होना चाहिए, वहां आप बातचीत से भाग रहे हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान एनएसए (NSA) लगाने और दुकानें बंद कराने जैसे प्रशासनिक कदमों की कड़ी आलोचना की।

सरकार की इस्तीफा न देने की नीति सिब्बल ने इतिहास का हवाला देते हुए लाल बहादुर शास्त्री के इस्तीफे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की यह सोच गलत है कि इस्तीफा देने से उनकी हार हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अंग्रेजों का शासन नहीं, बल्कि लोकतंत्र है, जहां तानाशाही की कोई जगह नहीं है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की देरी पर सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने पूछा कि जब यही कदम उठाना था, तो इसमें इतनी देरी क्यों की गई? उन्होंने मांग की कि जो पुलिसकर्मी छात्रों पर अत्याचार कर रहे हैं और जिनके कारण महिलाओं को प्रताड़ना झेलनी पड़ी, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की जानी चाहिए।

लोकतंत्र में बातचीत ही एकमात्र रास्ता सिब्बल ने जोर देकर कहा कि 28 जून से चल रहा यह आंदोलन अब देशव्यापी हो चुका है। हजारों की संख्या में देश के कोने-कोने से छात्र दिल्ली पहुंच रहे हैं और 23 दिनों तक अनशन जैसे कदम उठा चुके हैं। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि पार्लियामेंट में बहस करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर छात्रों से संवाद स्थापित करना ही समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान है।

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