क्या सोनम वांगचुक और CJP की राहें हुईं जुदा? नीट पेपर लीक आंदोलन में बढ़ती दरार
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नीट पेपर लीक विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली में चल रहा आंदोलन एक नए मोड़ पर खड़ा है। इस प्रदर्शन का मुख्य चेहरा रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार से मिले आश्वासनों के बाद वांगचुक के इस कदम ने आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उनके बीच दूरियां पैदा कर दी हैं।

सरकार और वांगचुक के बीच बनी सहमति केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद वांगचुक ने अनशन तोड़ने का ऐलान किया। सरकार ने उन्हें तीन प्रमुख आश्वासन दिए हैं: प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलेगा और संसद में परीक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी। वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर इसे जवाबदेही की शुरुआत बताया है।

इस्तीफे की मांग पर बढ़ा मतभेद आंदोलन की शुरुआत से ही CJP और वांगचुक की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। हालांकि, सरकार के साथ हुए समझौते में वांगचुक ने इस मांग को दरकिनार कर दिया है। वांगचुक के इस नरम रुख से CJP असहमत नजर आ रही है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CJP या उसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अनशन समाप्त करने वाले वीडियो को अपने आधिकारिक हैंडल से शेयर तक नहीं किया है।

जंतर-मंतर पर अभी भी जारी है संग्राम सोनम वांगचुक के कदम पीछे खींचने के बावजूद दिल्ली के जंतर-मंतर पर तनाव बरकरार है। CJP ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, उनका धरना जारी रहेगा। आज भी जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं और सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। मध्य दिल्ली में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच इलाके में इंटरनेट सेवाओं को भी सीमित किया गया है।

विपक्ष और CJP का आक्रामक रुख वांगचुक के हटने के बाद अब सारा दारोमदार CJP पर आ गया है, जिसे विपक्ष का पूरा समर्थन मिल रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा परीक्षा सुधारों के लिए कड़े कानून लाने की घोषणा पर CJP ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार की सबसे सख्त कार्यवाही धर्मेंद्र प्रधान को हटाना होगा। वहीं, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सरकार के दावों पर कटाक्ष करते हुए इसे अधूरे समाधान की संज्ञा दी है।

अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या CJP बिना वांगचुक के समर्थन के इस आंदोलन की धार को बरकरार रख पाएगी, या सरकार के साथ वांगचुक की यह सुलह आंदोलन को कमजोर कर देगी।

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