20 साल तक पत्नी से नहीं की एक भी बात, जापान के इस शख्स की खामोश सजा ने किया सबको हैरान
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अजीब जिद से शुरू हुआ सिलसिला जापान के नारा शहर में रहने वाले ओटो कातायामा ने अपनी पत्नी युमी से पूरे 20 साल तक बात नहीं की। 1997 में शुरू हुई यह चुप्पी तब शुरू हुई जब ओटो को अपने नवजात बच्चों के प्रति पत्नी का लगाव देखकर जलन होने लगी। ओटो ने अपनी पत्नी को सजा देने के लिए बातचीत करना बंद कर दिया।

एक घर, तीन बच्चे और दो दशक की चुप्पी हैरानी की बात यह है कि इन 20 सालों में दोनों एक ही छत के नीचे रहे। उन्होंने तीन बच्चों की परवरिश की और साथ खाना भी खाया। इस दौरान तीसरा बच्चा भी हुआ, लेकिन ओटो ने अपनी पत्नी से कभी कोई शब्द नहीं बोला। वे केवल सिर हिलाकर या कूं-कूं जैसी आवाजें निकालकर जवाब देते थे, जबकि बच्चों से वे पूरी तरह सामान्य व्यवहार करते थे।

बेटे की पहल ने तोड़ा मौन 2017 में ओटो के 18 वर्षीय बेटे योशिकी ने टीवी होक्काइडो को पत्र लिखकर मदद मांगी। बेटे को डर था कि पिता के रिटायरमेंट के बाद घर में साथ रहना परिवार के लिए मानसिक रूप से घातक साबित होगा। बेटे की जिद पर एक रियलिटी शो के मेकर्स ने दोनों को उसी पार्क की बेंच पर बिठाया, जहां वे अपनी पहली डेट पर मिले थे।

रोते हुए मांगी माफी छिपे हुए कैमरों के सामने ओटो ने 20 साल बाद अपना पहला वाक्य बोला- काफी समय हो गया है हमें बात किए हुए। उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों पर पत्नी का ध्यान देखकर वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे और अपने अहंकार के कारण उन्होंने यह साइलेंट ट्रीटमेंट अपनाया था। पत्नी के सामने उनकी आंखों में आंसू थे और बच्चों के लिए यह पल बेहद भावुक था।

क्या यह भावनात्मक शोषण है? यह मामला जापान में रिटायर्ड हस्बैंड सिंड्रोम पर बहस छेड़ गया है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किसी पार्टनर को सजा देने के लिए सालों तक चुप्पी साधे रखना इमोशनल एब्यूज है। यह व्यवहार न केवल रिश्ते को खत्म करता है, बल्कि परिवार के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है।

बदलते रिश्ते और अकेलापन इस घटना ने जापान में रिश्तों के बदलते ट्रेंड्स को भी उजागर किया। रिपोर्टों के अनुसार, अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाने के कारण वहां के युवा अब पारंपरिक रिश्तों से दूर हो रहे हैं। एक सरकारी सर्वे में सामने आया था कि जापान में बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं बिना किसी पार्टनर के रह रहे हैं, जो समाज में अकेलेपन की बढ़ती समस्या को दर्शाता है।

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