गोल्ड मेडल का सच: क्या वाकई पूरा सोना होता है? जानें स्कॉटलैंड कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी हर अहम जानकारी
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गूंज शुरू हो चुकी है। 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में दुनिया भर के एथलीट्स मेडल्स के लिए अपना पसीना बहाएंगे। भारत की नजरें एक बार फिर कुश्ती, बैडमिंटन, मुक्केबाजी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में पदकों की बौछार करने पर हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस गोल्ड मेडल के लिए ये एथलीट्स दिन-रात मेहनत करते हैं, क्या वह वास्तव में शुद्ध सोने का होता है?

क्या गोल्ड मेडल में सचमुच सोना होता है?

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का नहीं होता। यह मुख्य रूप से स्टर्लिंग सिल्वर से बना होता है, जिस पर शुद्ध सोने की परत (गोल्ड प्लेटिंग) चढ़ाई जाती है। एक गोल्ड मेडल में कुल वजन का मात्र 5 से 6 प्रतिशत ही सोना होता है।

इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला, सोना काफी नरम धातु है, जिससे मेडल का आकार बिगड़ने का डर रहता है। दूसरा, यदि मेडल 100% सोने का बनाया जाए, तो उसकी कीमत इतनी अधिक हो जाएगी कि उसे हर इवेंट में देना संभव नहीं होगा। एक गोल्ड मेडल तैयार करने में लगभग 1 से 2 लाख रुपये का खर्च आता है।

एथलीट्स क्यों काटते हैं मेडल को दांतों से?

पोडियम पर जीत के बाद एथलीट्स का मेडल को दांतों से दबाने का फोटो अक्सर वायरल होता है। पुरानी परंपरा के अनुसार, सोना नरम होता है, इसलिए खिलाड़ी उसे असली परखने के लिए दांत से काट कर देखते थे। हालांकि, अब यह केवल पत्रकारों के कहने पर किया जाने वाला एक सिग्नेचर पोज रह गया है। आधुनिक मेडल्स पर सिर्फ सोने की परत होती है, इसलिए इन्हें दांतों से काटना अब सिर्फ एक स्टाइल स्टेटमेंट है।

क्या खिलाड़ी अपना मेडल बेच सकते हैं?

जी हां, मेडल एथलीट की निजी संपत्ति होती है। अगर कोई खिलाड़ी आर्थिक तंगी या किसी सामाजिक उद्देश्य (चैरिटी) के लिए इसे नीलाम करना चाहे, तो वह ऐसा कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय खेल संगठन आमतौर पर इस पर कोई रोक नहीं लगाते, बशर्ते मेडल चोरी का या अवैध न हो।

भारत: एक गौरवशाली सफर

भारत ने 1934 में कॉमनवेल्थ गेम्स में डेब्यू किया था, लेकिन पहला गोल्ड मेडल जीतने के लिए देश को 24 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। साल 1958 में कार्डिफ में हुए खेलों में महान धावक मिल्खा सिंह ने भारत को पहला ऐतिहासिक गोल्ड मेडल दिलाया था। तब से लेकर आज तक भारत का सफर शानदार रहा है। 2010 के दिल्ली खेलों में भारत ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 38 गोल्ड सहित कुल 101 पदक जीते थे।

ग्लासगो 2026 में 125 सदस्यीय भारतीय दल एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों से देश को फिर एक बार स्वर्णिम उम्मीदें हैं।

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