NEET विवाद: कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च और राहुल गांधी का धरना, क्या खतरे में है मोदी सरकार?
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NEET पेपर लीक मामले ने अब एक विशाल जनआंदोलन का रूप ले लिया है। सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित संसद मार्च ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब दिल्ली की सड़कों पर सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

उम्मीद से कहीं अधिक उमड़ा जनसैलाब शुरुआत में इस आंदोलन में केवल एक हजार लोग शामिल थे, लेकिन सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। आयोजकों ने 20 हजार लोगों की उम्मीद की थी, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो संसद मार्च में 30 हजार से एक लाख तक लोग उमड़ पड़े। यह भीड़ सरकार के प्रति बढ़ते आक्रोश का स्पष्ट संकेत है।

राहुल-प्रियंका का मोर्चा और विपक्ष की लामबंदी आज आंदोलन को और धार तब मिली, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सीधे अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मिले। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के समर्थन ने इसे एक संयुक्त विपक्ष का रूप दे दिया है, जिससे मोदी सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है।

पुलिस कार्रवाई बनी आंदोलन का टर्निंग पॉइंट संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल ने आग में घी डालने का काम किया। बच्चों के घायल होने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के प्रति सहानुभूति की लहर दौड़ गई। इसी का परिणाम है कि आंदोलन अब गैर-राजनीतिक दायरे से निकलकर मुख्यधारा की राजनीति पर हावी हो गया है।

सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं:

  1. सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
  2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  3. NEET परीक्षार्थियों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा।

सरकार की मुश्किलें और भविष्य की राह राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अब सरकार के नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। एक ओर सोनम वांगचुक का अडिग अनशन सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, तो दूसरी ओर संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे के कारण विधायी एजेंडा भी ठप पड़ा है।

अब सवाल यह है कि क्या भाजपा परंपरा के विपरीत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेगी या प्रदर्शनकारियों के साथ किसी मध्य मार्ग पर सहमति बनेगी? सरकार के लिए इस्तीफे की मांग अब सिर्फ शिक्षा मंत्री तक सीमित नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री तक पहुंच चुकी है। आने वाले कुछ दिन सरकार के लिए किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे।

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