दिल्ली से टोरंटो तक गूंजा CJP आंदोलन: नीट पेपर लीक और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरा जनसैलाब
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब एक राष्ट्रव्यापी जनांदोलन बन चुका है। नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही और शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी मुहिम में बदल गया है। दिल्ली से शुरू हुई यह चिंगारी अब बेंगलुरु, मुंबई, रायपुर समेत देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंच गई है।

बेंगलुरु में जुटी हजारों की भीड़ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में रविवार को एक हजार से अधिक लोग जुटे। सुबह सौ लोगों से शुरू हुआ यह प्रदर्शन दोपहर तक विशाल रूप ले चुका था। प्रदर्शनकारियों ने साफ संदेश दिया कि अब खामोशी का दौर खत्म हो चुका है। यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज रही, साथ ही सोनम वांगचुक के अनशन और उनके साथ हुई सरकारी सख्ती पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

युवाओं में आक्रोश, जवाबदेही की मांग आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना है कि वे सिर्फ परीक्षार्थी नहीं, बल्कि देश के भविष्य के रक्षक हैं। 13 साल की सोहन और छात्रा काव्या ने तीखे शब्दों में कहा कि नीट की असफलता महज परीक्षा की नाकामी नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था का पतन है। युवाओं ने स्पष्ट किया कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस जवाबदेही चाहिए। उनका मानना है कि सरकारों को यह नहीं समझना चाहिए कि युवा सब कुछ चुपचाप देख रहे हैं।

रायपुर से लेकर पूर्वोत्तर तक जारी विरोध रायपुर में मूसलाधार बारिश भी प्रदर्शनकारियों के बुलंद हौसलों को नहीं डिगा सकी। अंबेडकर चौक पर सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर सोनम वांगचुक के समर्थन में नारे लगाए। उधर, मुंबई में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है। वहीं, शिलांग, दीमापुर और गुवाहाटी जैसे पूर्वोत्तर शहरों में भी लोगों ने बैनर और प्लेकार्ड के साथ सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद की।

उत्तर प्रदेश और विदेशों में भी समर्थन उत्तर प्रदेश के भदोही और पीलीभीत में भी स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन देखे गए। आंदोलन का दायरा भारत की सीमाओं को पार कर चुका है। टोरंटो (कनाडा) में भारतीय समुदाय के लोग कॉन्सुलेट के बाहर एकत्र हुए, जबकि यूके के लंदन, मैनचेस्टर और ग्लासगो जैसे शहरों में भी CJP अभियान और सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन हुए।

दिल्ली में संसद मार्च और सरकार पर दबाव दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च का आह्वान किया था। जंतर-मंतर पर डेरा डाले प्रदर्शनकारियों को हालांकि पुलिस ने बीच में ही रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी बात रखने में सफल रहे। CJP का दावा है कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दबाव के बाद अब केंद्र सरकार वार्ता के लिए तैयार है, जो इस आंदोलन की पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है।

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