16 दिन का अनशन, अस्पताल से अमित भटनागर की दो टूक: जबरदस्ती की तो पानी भी त्याग दूंगा
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केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ 16 दिनों से सांकेतिक चिता पर बैठकर अनशन कर रहे अमित भटनागर को प्रशासन ने रविवार तड़के बलपूर्वक उठा लिया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें छतरपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन भटनागर ने साफ कर दिया है कि उनका संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है।

अस्पताल से दी चेतावनी अस्पताल के बिस्तर से जारी संदेश में भटनागर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, मैं न ड्रिप लगवाऊँगा और न ही कुछ खाऊँगा। मेरा आमरण अनशन जारी है। अगर मुझे जबरन खिलाने या ड्रिप लगाने की कोशिश की गई, तो मैं पानी पीना भी छोड़ दूँगा।

बेटे की अपील भी नहीं आई काम प्रशासन ने आंदोलन को खत्म करने के लिए हर संभव दबाव बनाया। परिजनों और उनके मासूम बेटे तक के जरिए अनशन तुड़वाने की कोशिश की गई, लेकिन भटनागर अपने रुख पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक विस्थापित आदिवासियों को न्याय और पुनर्वास की ठोस गारंटी नहीं मिलती, वे पीछे नहीं हटेंगे।

विपक्ष का हमला: दमन का शासन कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार संवाद के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है। सिंघार के अनुसार, असहमति की हर आवाज को कुचलना भाजपा सरकार का शासन मॉडल बन चुका है।

अन्ना आंदोलन से बिजावर तक का सफर कभी B.Ed. कॉलेज संचालित करने वाले अमित भटनागर का झुकाव 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से सामाजिक सक्रियता की ओर हुआ। वे आम आदमी पार्टी के टिकट पर बिजावर से चुनाव भी लड़ चुके हैं। स्थानीय स्तर पर वे अपनी सादगी और किसानों-आदिवासियों के लिए निरंतर संघर्ष करने वाले नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं।

44 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट और विस्थापन का सच 44,000 करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास दिसंबर 2024 में हुआ था। सरकार इसे बुंदेलखंड के लिए वरदान बता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि परियोजना के दायरे में आने वाले हजारों आदिवासी और गरीब परिवार बेघर होने की कगार पर हैं। विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा। फिलहाल, प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है, जिससे तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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