मिडिल ईस्ट में महायुद्ध : जॉर्डन हमले का बदला लेने के लिए अमेरिका का ईरान पर भीषण हवाई हमला
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मध्य पूर्व का तनाव अब एक विनाशकारी युद्ध के रूप में बदल चुका है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले के बाद, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। पेंटागन ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाकर बड़ी हवाई कार्रवाई शुरू की है।

जॉर्डन हमले का बदला और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि ईरान द्वारा प्रायोजित हमले में जॉर्डन में तैनात दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस हमले में एक सैनिक के लापता होने की भी खबर है। घटना के तुरंत बाद, अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल दंडित करने की नीति अपनाई है।

30 फाइटर जेट्स से दहला ईरान

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिका के 30 से अधिक लड़ाकू जेट्स का उपयोग किया गया है। शनिवार देर रात करीब 1:30 बजे ईरान के दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत स्थित सिरिक इलाके को निशाना बनाया गया। इन हमलों का स्पष्ट उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करना है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक तेल टैंकरों की आवाजाही को बाधित करती है।

इराक और कुर्दिस्तान बने युद्ध का अखाड़ा

तनाव का दायरा बढ़ता जा रहा है। रविवार तड़के इराक के इरबिल में भी ड्रोन हमले हुए, जिसमें कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के आठ सदस्य घायल हो गए। इरबिल में लगातार हो रहे धमाकों ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी की हालिया अमेरिकी यात्रा के बाद ये हमले भू-राजनीतिक अस्थिरता को और गहराते हैं।

ईरान की धमकी और वैश्विक चिंताएं

हमले से पहले, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि यदि हमले जारी रहे, तो उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाएगा जो इतिहास याद रखेगा। वहीं, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने ईरान पर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने और युद्ध अपराध करने का गंभीर आरोप लगाया है।

युद्ध का बढ़ता खौफनाक आंकड़ा

यह संघर्ष अब भयावह होता जा रहा है। युद्ध की शुरुआत से अब तक कुल 16 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं। तेहरान और वाशिंगटन के बीच का अंतरिम समझौता पूरी तरह विफल हो चुका है, जिससे दुनिया पर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। अभी तक किसी भी समूह ने इराक में हुए हालिया ड्रोन हमलों की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन संदेह ईरान समर्थित मिलिशिया पर ही है।

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