भारत ने अंतरिक्ष की दौड़ में एक नया इतिहास रच दिया है। हैदराबाद की स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने अपने ‘विक्रम-1’ रॉकेट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर भारत को निजी स्पेस-टेक के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से खड़ा कर दिया है। अब तक यह काम सिर्फ इसरो (ISRO) जैसी सरकारी एजेंसियों के पास था, लेकिन अब भारत अमेरिका और चीन की कतार में शामिल हो गया है।
स्काईरूट की शुरुआत 2018 में इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने की थी। उनका लक्ष्य स्पष्ट था: अंतरिक्ष तक पहुंच को आसान और सस्ता बनाना। आज 24 साल बाद, दुनिया भर में 10,000 स्पेस कंपनियां हैं, जिनमें से 400 अकेले भारत में हैं। स्काईरूट की सफलता यह बताती है कि भारत का प्राइवेट सेक्टर अब बड़े वैश्विक खिलाड़ियों को चुनौती देने के लिए तैयार है।
विक्रम-1 की सफलता इसरो के लिए भी किसी राहत से कम नहीं है। भविष्य में व्यावसायिक लॉन्च का जिम्मा प्राइवेट कंपनियों के हाथों में जाने से इसरो अपने संसाधनों का उपयोग गहरे अंतरिक्ष मिशन (Deep Space Missions) और तकनीकी अनुसंधान में कर सकेगा। स्काईरूट भारत के लिए वही भूमिका निभा सकती है जो अमेरिका के लिए एलन मस्क की ‘स्पेस-एक्स’ ने निभाई है।
स्काईरूट खुद को केवल रॉकेट निर्माता नहीं, बल्कि ‘स्पेस एक्सेस कंपनी’ मानती है। इसकी कमाई के मुख्य स्रोत ये हैं:
मई 2026 में स्काईरूट 60 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ ‘यूनिकॉर्न’ बन गई, जिसका मूल्यांकन अब 9,000 करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, तकनीक से बढ़कर चुनौती अब बाजार में टिके रहने की है।
छोटे सैटेलाइट लॉन्चिंग का बाजार बेहद प्रतिस्पर्धी है। स्पेस-एक्स और अन्य वैश्विक कंपनियों को टक्कर देने के लिए स्काईरूट को न केवल अपनी लागत कम रखनी होगी, बल्कि लॉन्च की आवृत्ति और विश्वसनीयता को भी लगातार साबित करना होगा।
साल 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का फैसला अब रंग ला रहा है। स्काईरूट की कामयाबी यह साबित करती है कि भारतीय प्राइवेट स्पेस सेक्टर में न केवल निवेश की अपार संभावनाएं हैं, बल्कि तकनीक के मामले में हम दुनिया को टक्कर देने की स्थिति में हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्काईरूट कितनी तेजी से अपने अगले मिशन पूरे करता है।
🚨 𝗟𝗶𝗳𝘁𝗼𝗳𝗳 𝗼𝗳 𝗦𝗸𝘆𝗿𝗼𝗼𝘁 𝗔𝗲𝗿𝗼𝘀𝗽𝗮𝗰𝗲 𝘀 𝗩𝗶𝗸𝗿𝗮𝗺-𝟭 𝗿𝗼𝗰𝗸𝗲𝘁 𝗮𝘁 𝟭𝟮:𝟬𝟱 𝗣𝗠 𝗜𝗦𝗧 𝗳𝗿𝗼𝗺 𝘁𝗵𝗲 𝗙𝗶𝗿𝘀𝘁 𝗟𝗮𝘂𝗻𝗰𝗵 𝗣𝗮𝗱 𝗮𝘁 𝗦𝗛𝗔𝗥! 🚀
— ISRO Spaceflight (@ISROSpaceflight) July 18, 2026
The era of commercial spaceflight has begun in India 🇮🇳#Skyroot | #Vikram1 pic.twitter.com/yba2WRW1Ck
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