छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सुशासन मॉडल डिजिटल क्रांति की नई इबारत लिख रहा है। राज्य सरकार ने राजस्व सेवाओं को पूरी तरह हाईटेक कर दिया है, जिससे अब बी-1, खसरा और किसान किताब जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सीधे नागरिकों के व्हाट्सएप पर उपलब्ध हो रहे हैं।
व्हाट्सएप से घर बैठे मिल रहे दस्तावेज अब किसानों और भू-स्वामियों को पटवारी या तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। सरकार की नई व्यवस्था के तहत, केवल अपना खसरा नंबर या नाम दर्ज करते ही डिजिटल हस्ताक्षर और क्यूआर कोड युक्त पीडीएफ फाइल कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप पर मिल रही है। यह पहल समय और धन, दोनों की भारी बचत कर रही है।
वसुंधरा प्रोजेक्ट से पुराना रिकॉर्ड हो रहा डिजिटल सरकार वसुंधरा (VASUNDHARA) परियोजना के माध्यम से दशकों पुराने राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप दे रही है। इसका लक्ष्य दिसंबर 2026 तक सभी रिकॉर्ड्स को ऑनलाइन करना है। साथ ही, नकल शाखाओं को भी ऑनलाइन कर दिया गया है, जिससे प्रमाणित प्रतियां तुरंत उपलब्ध हो पा रही हैं।
भुइयाँ पोर्टल पर रिकॉर्ड का अंबार एनआईसी द्वारा विकसित भुइयाँ पोर्टल ने पारदर्शिता की नई मिसाल कायम की है। अब तक 2.4 करोड़ से अधिक खसरे डिजिटल हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं। इस पोर्टल पर भूमि विवाद से लेकर गिरदावरी तक की हर जानकारी अब आम आदमी की पहुंच में है।
ऑटो-म्यूटेशन से खत्म होगा मानवीय हस्तक्षेप राज्य सरकार ने साइबर तहसील व्यवस्था को मजबूत करते हुए ऑटो-म्यूटेशन की प्रक्रिया शुरू की है। अब संपत्ति की रजिस्ट्री होते ही उसका विवरण राजस्व रिकॉर्ड में स्वतः अपडेट हो जाएगा। इससे नामांतरण के लिए होने वाली लंबी प्रक्रिया और मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
पारदर्शी और तेज हुई प्रशासनिक सेवा सेवा सेतु पोर्टल के जरिए नामांतरण और किसान किताब के लिए आवेदन करना अब बेहद आसान है। नागरिक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं और काम पूरा होते ही एसएमएस अलर्ट के जरिए सूचित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय का यह डिजिटल मॉडल छत्तीसगढ़ को सुशासन की दिशा में एक आधुनिक राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है।
आमजन के लिए राजस्व सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) July 11, 2026
ऑटो म्यूटेशन (स्वतः नामांतरण) और ऑटो डायवर्सन (स्वतः भूमि उपयोग परिवर्तन) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं ने जमीन से जुड़े कार्यों को पहले से कहीं अधिक सहज, तेज और भरोसेमंद… pic.twitter.com/6dSVnYfgMb
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