भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। इसरो के दो पूर्व वैज्ञानिक, पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने स्काईरूट एयरोस्पेस के जरिए प्राइवेट स्पेस-टेक के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। महज 8 वर्षों में उनकी कंपनी 10,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन के साथ भारत की पहली प्राइवेट स्पेस यूनिकॉर्न बन गई है।
इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम पवन और नागा ने इसरो में मिले अनुभव का सही इस्तेमाल किया। उन्होंने 3D-प्रिंटिंग तकनीक और कार्बन-कंपोजिट संरचना का उपयोग करके विक्रम-1 रॉकेट विकसित किया है। यह रॉकेट न केवल किफायती है, बल्कि इसे बहुत कम समय में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है। यह तकनीक वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत कर रही है।
अंतरिक्ष की उबर सेवा स्काईरूट का बिजनेस मॉडल बेहद अनूठा है। कंपनी के सीईओ पवन कुमार चंदना इसे अंतरिक्ष के लिए उबर कैब सर्विस बताते हैं। अभी तक छोटे सैटेलाइट्स को भेजने के लिए इसरो जैसे बड़े मिशनों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से रॉकेट बुक कर सकेंगे। वे अपनी सुविधा के अनुसार समय और कक्षा (Orbit) खुद चुन सकते हैं।
मेड इन इंडिया की ताकत विक्रम-1 रॉकेट का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वदेशी है। इसे भारत के ही 400 से ज्यादा सप्लायर्स की मदद से तैयार किया गया है। 7 मंजिला ऊंचा यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक का वजन अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। 2022 में विक्रम-एस की ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब कंपनी अपने पहले ऑर्बिटल मिशन आगमन की तैयारी में जुटी है।
निजी क्षेत्र में भारत का दबदबा 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के सरकारी फैसले ने इन वैज्ञानिकों के सपनों को पंख दिए। स्काईरूट की सफलता यह साबित करती है कि भारत अब अंतरिक्ष तकनीक के मामले में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
24 hours to lift-off. 🚀
— Pawan (@PawanKChandana) July 17, 2026
Eight years ago, @SkyrootA started with just two people with an idea.
There was no policy framework for private spaceflight in India, no real funding ecosystem for space startups, and we were taking on one of the world’s hardest engineering challenges.… pic.twitter.com/wRDmgXoRx5
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