फिर लौटा कातिल कोरोना: आंध्र प्रदेश से यूपी तक दहशत, क्या फिर से वही तबाही का दौर?
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कोरोना वायरस एक बार फिर चर्चा में है। 2020-21 की भयावह यादें ताजा हो गई हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों से कोविड-19 के नए मामले सामने आ रहे हैं। इस बार आंध्र प्रदेश से आई खबर ने सबको चिंता में डाल दिया है।

आंध्र प्रदेश में मौत का साया आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोरोना संक्रमण के कारण दो लोगों की मौत हो गई है। इनमें से एक 52 वर्षीय व्यक्ति थे, जिन्हें बुखार और खांसी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दूसरे मृतक को डायबिटीज और किडनी जैसी गंभीर बीमारियां भी थीं। इसके अलावा, कडप्पा में ही 8 अन्य लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

देशभर में फैल रहा संक्रमण कोरोना का दायरा सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है। वाराणसी में 27 साल का एक युवक संक्रमित पाया गया है, जिसे बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुंबई से गायक कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू के भी कोरोना संक्रमित होने की खबर है। दिल्ली-एनसीआर में भी कई लोग संक्रमित होकर इलाज करवा रहे हैं, जो खतरे की घंटी है।

क्या यह ओमिक्रॉन का सब-वेरिएंट है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना की यह नई लहर ओमिक्रॉन के किसी सब-वेरिएंट का असर हो सकती है। हालांकि, यह वेरिएंट पहले के मुकाबले कम घातक माना जाता है, लेकिन शरीर की कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) के कारण यह फिर से सक्रिय हो रहा है। वायरस के म्यूटेशन की अनिश्चितता ने वैज्ञानिकों और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

ग्लेशियरों से जाग रहे जॉम्बी वायरस खतरा सिर्फ कोरोना तक सीमित नहीं है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हजारों साल पुराने जॉम्बी वायरस भी बाहर आ रहे हैं। तिब्बत और साइबेरिया की जमी हुई बर्फ से ऐसे कई अज्ञात वायरस मिले हैं, जिन पर वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। ये नई चुनौतियां मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

नींद की कमी और इम्यूनिटी का संकट बढ़ते तापमान और गर्मी के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के गर्म इलाकों में लोग साल में औसतन 66 से 93 घंटे की नींद खो रहे हैं। नींद की कमी सीधे तौर पर इम्यूनिटी को कमजोर करती है, जिससे शरीर वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।

बचाव ही है एकमात्र उपाय डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि अब अतिरिक्त सतर्कता बरतने का समय है। कोरोना फिर से लौट आया है, भले ही इसका प्रभाव अलग हो। अपनी डाइट, भरपूर नींद और स्वच्छता पर ध्यान देना अनिवार्य है। बचाव ही इस महामारी से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार है, इसलिए घबराने के बजाय सावधानी को प्राथमिकता दें।

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