कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग, अमेरिका तक फैला जहरीले धुएं का गुबार
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कनाडा के जंगलों में लगी भीषण आग ने विकराल रूप ले लिया है। देश में 100 से अधिक जगहों पर जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। आग से उठने वाला घना धुआं अब अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर अमेरिका के मिडवेस्ट और नॉर्थईस्ट इलाकों तक पहुंच गया है, जिससे वहां का आसमान नारंगी और धुंधला हो गया है।

हजारों पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया

मिनेसोटा के मशहूर बॉर्डरी वाटर्स कैनो एरिया वाइल्डरनेस में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। यह 11 लाख एकड़ का इलाका डेलावेयर राज्य के बराबर है। यहां फंसे 6,000 से 10,000 पर्यटकों को बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। रेंजर्स के अनुसार, बुधवार तक 90% लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इलाके को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

अमेरिका में सांस लेना हुआ मुश्किल

हवा के रुख ने कनाडा की इस आग के धुएं को अमेरिका के मिनेसोटा, मिशिगन, विस्कॉन्सिन, न्यूयॉर्क और मेन जैसे राज्यों में फैला दिया है। मिनियापोलिस जैसे शहरों में हवा इतनी खराब हो गई है कि लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाहर निकलने पर कैंपफायर जैसी तेज गंध महसूस हो रही है और अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

स्वास्थ्य के लिए खतरनाक सांस का संकट

जंगल की आग से निकले बारीक कण (PM2.5) हवा की गुणवत्ता को बेहद खतरनाक स्तर पर ले आए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और दिल-फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकती है। अधिकारियों ने लोगों को घर के अंदर रहने, खिड़कियां बंद रखने और बाहर निकलने पर अनिवार्य रूप से N95 मास्क पहनने की सलाह दी है।

आग का परफेक्ट स्टॉर्म

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय से जारी सूखे और रिकॉर्ड कम बर्फबारी ने जंगलों को बारूद की तरह सूखा बना दिया है। जलवायु परिवर्तन के चलते ये आगें अब पहले से ज्यादा बार और तीव्र हो रही हैं। मिनेसोटा समेत अमेरिका के 15 राज्यों में भी जंगलों में आग सक्रिय है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी और सूखे के इस परफेक्ट स्टॉर्म के चलते हालात सुधरने के बजाय आने वाले दिनों में और बिगड़ सकते हैं।

कनाडा के इन जंगलों की आग अब सिर्फ एक स्थानीय आपदा नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय स्वास्थ्य संकट बन चुकी है, जिसका असर सैकड़ों मील दूर तक महसूस किया जा रहा है।

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