कभी पुलिस खोजती थी भैंस, अब ड्रीम प्रोजेक्ट पर चलेगा बुलडोजर... कैसे खत्म हुआ आजम खान का दबदबा?
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रामपुर की सियासत में करीब 40 साल तक बेताज बादशाह रहे समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का दौर अब ढलान पर है। एक समय था जब रामपुर में आजम की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था, लेकिन आज वही आजम खान खुद कानूनी शिकंजे में हैं और उनका ड्रीम प्रोजेक्ट ढहने की कगार पर है।

भैंस चोरी का वो रौबदार दौर

आजम खान के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2014 में जब उनके फार्महाउस से 7 भैंसें चोरी हुईं, तो पूरा प्रशासन हरकत में आ गया था। पुलिस की कई टीमें उन्हें खोजने में लगा दी गईं। भैंसें मिलने के बाद उन्हें मच्छरों से बचाने के लिए थाने में स्पेशल इंतजाम किए गए थे। आज वही आजम खान जेल में हैं और उनका राजनीतिक रसूख खत्म होता दिख रहा है।

सत्ता का बदलाव और कानूनी शिकंजा

2014 में केंद्र और 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद आजम खान के लिए मुसीबतों का दौर शुरू हुआ। उन पर भड़काऊ भाषण, फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और जमीन कब्जाने जैसे 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए। पिता से लेकर बेटे तक, पूरा परिवार कानूनी फेर में फंस गया। फर्जी दस्तावेजों के चलते आजम की विधानसभा सदस्यता रद्द हुई और चुनाव लड़ने पर रोक लग गई।

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की आहट

आजम खान का सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट —मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी—अब उनके पतन का केंद्र बन गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी के अवैध बने 38 कमरों को ढहाने का आदेश जारी कर दिया है। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और नियमों की अनदेखी के आरोपों ने इस संस्थान को निशाने पर ला खड़ा किया है।

आम जनता के लिए खुला निजी रास्ता

यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली 3 किलोमीटर लंबी सड़क, जो 2019 से आम लोगों के लिए बंद थी, अब फिर से खोल दी गई है। पीडब्ल्यूडी ने इस सड़क पर आम रास्ता होने का बोर्ड लगा दिया है। 17 करोड़ की सरकारी लागत से बनी इस सड़क पर अब आम जनता बिना रोक-टोक के आ-जा सकेगी।

सियासी रार: बदले की राजनीति या कानून का पालन?

इस कार्रवाई पर सियासत भी गरमा गई है। सपा और कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार की बदले की राजनीति करार दिया है। सपा प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार शिक्षा के केंद्र को निशाना बना रही है। वहीं, भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई बता रही है।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने साफ कर दिया है कि रामपुर में अब आजम खान का वो पुराना दौर नहीं रहा। एक के बाद एक झटकों ने न केवल उनकी राजनीतिक साख को कमजोर किया है, बल्कि उनके द्वारा खड़े किए गए साम्राज्य को भी ढहाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

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