पाकिस्तान में हाहाकार: 180 रुपये किलो हुआ आटा, रोटी के लिए सड़कों पर मची मारामारी
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पाकिस्तान इस समय एक गहरे आर्थिक और मानवीय संकट से गुजर रहा है। दुनिया भर में शांति का दूत बनने का दिखावा करने वाले शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के शासन में देश की जनता दो वक्त की रोटी के लिए तरस रही है। इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक खाने-पीने का संकट विकराल रूप धारण कर चुका है।

180 रुपये प्रति किलो आटा, लोग बेहाल

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आटे की कीमतें आसमान छू रही हैं। बाजार में आटा 110 से 180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। आम जनता के लिए पेट भरना मुश्किल हो गया है, और आशंका है कि अगर सप्लाई चेन में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।

क्यों बंद हो रही हैं 45 फ्लोर मिलें?

इस संकट के पीछे पंजाब फूड डिपार्टमेंट (PFD) का एक मनमाना फैसला है। विभाग ने बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक रूप से गेहूं की सप्लाई के परमिट सस्पेंड कर दिए हैं। इसके चलते इस्लामाबाद की करीब 45 फ्लोर मिलें बंद होने की कगार पर हैं। फ्लोर मिल्स एसोसिएशन का आरोप है कि अचानक लिए गए इस फैसले ने बाजार में ब्लैक मार्केटिंग और भ्रष्टाचार के दरवाजे खोल दिए हैं।

रावलपिंडी भी चपेट में, चेतावनी जारी

इस्लामाबाद और रावलपिंडी का मिलिंग सिस्टम आपस में जुड़ा हुआ है। PFMA के रावलपिंडी चैप्टर ने चेतावनी दी है कि यदि राजधानी की सप्लाई तुरंत बहाल नहीं की गई, तो रावलपिंडी की मिलें भी अपना कामकाज बंद कर देंगी। गौर करने वाली बात यह है कि रावलपिंडी देश का पावर सेंटर है, जहाँ सेना का मुख्यालय स्थित है। अब यह अराजकता सेना के गढ़ तक पहुँच गई है।

डिजिटल पोर्टल का मजाक और सरकारी कुप्रबंधन

अजीब बात यह है कि पंजाब फूड डिपार्टमेंट ने खुद गेहूं की क्लीयरेंस के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया था और मिलों को रजिस्टर्ड किया था। मिलर्स सभी नियमों का पालन कर रहे थे, लेकिन बावजूद इसके बिना किसी उचित कारण के उनके परमिट एक्सेस को ब्लॉक कर दिया गया। महीनों से चल रही इस सप्लाइ रुकावट ने मिल मालिकों को गहरी वित्तीय अनिश्चितता में डाल दिया है।

जनता का हाल बेहाल, सत्ता मौन

एक तरफ पाकिस्तान की सत्ता में बैठे लोग और सेना के आला अधिकारी अपनी सुख-सुविधाओं में मस्त हैं, तो दूसरी तरफ सड़क पर गरीब जनता आटे की बोरी के लिए संघर्ष कर रही है। सरकार का यह कुप्रबंधन न केवल खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बना है, बल्कि इसने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कलाई खोलकर रख दी है।

क्या यह पाकिस्तान के लिए एक स्थायी भुखमरी की शुरुआत है? इस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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