गाजियाबाद: पुलिस बूथ के बाहर 40 मिनट तड़पता रहा युवक, मदद के बजाय बंद रहे पिंक बूथ के दरवाजे
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गाजियाबाद: मधुबन बापूधाम इलाके में हुई एक दुखद घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 वर्षीय राजकुमार नामक युवक की पिंक पुलिस बूथ के ठीक बाहर तड़प-तड़पकर मौत हो गई, जबकि मदद के लिए गुहार लगाता रहा।

किराये को लेकर शुरू हुआ विवाद घटना रविवार दोपहर करीब 3 बजे की है। पुलिस के अनुसार, एक ऑटो चालक और यात्री (राजकुमार) के बीच किराये के भुगतान को लेकर बहस हुई। दोनों कथित तौर पर शराब के नशे में थे। विवाद इतना बढ़ गया कि वे मधुबन बापूधाम स्थित पिंक पुलिस बूथ तक जा पहुंचे।

बूथ के अंदर बंद रहीं पुलिसकर्मी प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि जब विवाद बढ़ा, तो बूथ में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने मदद करने के बजाय बूथ के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए। उन्होंने युवक को पास के थाने जाने की सलाह दी। इस दौरान राजकुमार ने गुस्से में आकर बूथ के शीशे पर हाथ मारा, जिससे कांच टूट गया और उसका हाथ गंभीर रूप से कट गया।

40 मिनट तक बहता रहा खून हाथ से भीषण रक्तस्राव होने के बावजूद राजकुमार मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन कोई उसकी सुध लेने वाला नहीं था। वहां मौजूद भीड़ वीडियो बनाने में व्यस्त रही। स्थानीय दुकानदारों ने पीसीआर को सूचित किया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस और पुलिस की ठोस मदद नहीं मिल सकी। दावा है कि एम्बुलेंस को पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट का समय लग गया, तब तक युवक की जान जा चुकी थी।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल बिहार के सीवान का रहने वाला राजकुमार गाजियाबाद में मैकेनिक का काम करता था। उसकी पत्नी आठ महीने की गर्भवती है। परिजनों का आरोप है कि मामूली विवाद और पुलिस की लापरवाही ने एक घर का चिराग बुझा दिया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस का पक्ष एसीपी कविनगर उपासना पांडेय ने बताया कि घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही घायल को अस्पताल भेजने की कोशिश की गई थी। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस के दावों और बूथ पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच के घेरे में व्यवस्था यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। क्या एक पिंक पुलिस बूथ का काम केवल सूचना देना है या सुरक्षा सुनिश्चित करना? यदि पुलिसकर्मी अंदर मौजूद थे, तो उन्होंने घायल युवक के लिए एम्बुलेंस बुलाने या उसे प्राथमिक उपचार देने में इतनी देरी क्यों की? फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने नागरिकों के मन में पुलिस व्यवस्था को लेकर अविश्वास पैदा कर दिया है।

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