होर्मुज में फिर भड़की जंग: अमेरिका-ईरान के बीच टूटा युद्धविराम, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मँडराया संकट
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दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शांति की उम्मीदें एक बार फिर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में एक ऐसे विनाशकारी संघर्ष की आशंका बढ़ गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख सकता है।

अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी और सैन्य हमले

मंगलवार को अमेरिकी सेना ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरानी बंदरगाहों पर दोबारा नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है। यह कार्रवाई वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों के जवाब में की गई है। इसके साथ ही, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के तटीय ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। रात भर चले इस अभियान में ईरान के मिसाइल ठिकानों, ड्रोन साइट्स और कोस्टल डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया है।

ट्रंप की टोल टैक्स डिप्लोमेसी और यू-टर्न

इस तनाव के बीच सोमवार को नाटकीय मोड़ आया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज से गुजरने वाले हर कार्गो जहाज पर 20% पासिंग लेवी लगाने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, नाकाबंदी शुरू होने से कुछ घंटे पहले ट्रंप ने अपना फैसला बदल दिया। ओवल ऑफिस के अनुसार, खाड़ी देशों के नेताओं ने ट्रंप को टोल के बजाय अमेरिका में अरबों डॉलर के निवेश का विकल्प दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।

ईरान का खूनी पलटवार

अमेरिकी हमलों से तिलमिलाए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन के हितों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े दो तेल टैंकरों— मोम्बासा और अल बहियाह —पर मिसाइलें दागी गईं, जिसमें दो नाविकों की मौत हो गई और 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ब्लैकआउट का खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरती है। जैसे ही नाकाबंदी की खबर आई, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर $87 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। हालांकि अभी यह $78 के स्तर पर है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो तेल की कीमतें $120 के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह ठप हो सकती है।

क्या अब भी है शांति की उम्मीद?

फिलहाल, पाकिस्तान के नेतृत्व में एक मध्यस्थता टीम अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रही है। वहीं, लेबनान और इजराइल के प्रतिनिधि भी रोम में इस संकट के प्रभावों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस बारूदी ढेर को फटने से रोक पाएगी या दुनिया एक बड़े आर्थिक महायुद्ध की गवाह बनेगी।


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