PoK में खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की फायरिंग, 6 नागरिकों की मौत से दहला रावलाकोट
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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर बारूद के ढेर पर है। रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई के बाद स्थितियां बेकाबू हो गई हैं। सुरक्षा बलों की सीधी गोलीबारी में कम से कम छह नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।

रावलाकोट में मौत का तांडव हिंसा की शुरुआत रावलाकोट के न्यू बस टर्मिनल के पास हुई। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के नाम पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने अंधाधुंध फायरिंग की। इस हिंसक झड़प में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अरसलान अकबर और वाजिद हयात समेत छह लोगों की जान चली गई। झड़प के दौरान एक रेंजर के मारे जाने की भी सूचना है, जिसके बाद इलाके में सेना ने घेराबंदी बढ़ा दी है।

अमेरिका में गूंजी PoK की आवाज इस घटना से ठीक एक दिन पहले अमेरिका में रह रहे PoK के लोगों ने व्हाइट हाउस के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। करीब 100 प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तानी सेना को नागरिक इलाकों से तुरंत हटाया जाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में हस्तक्षेप करे।

इंटरनेट बंदी और गहराता खाद्य संकट PoK के करीब 40 लाख लोग पिछले लंबे समय से बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं। क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें सूचनाओं के आदान-प्रदान से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, स्थानीय आबादी भीषण खाद्य संकट और कुपोषण से जूझ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में 90 प्रतिशत परिवार भुखमरी की कगार पर हैं।

भारत का कड़ा रुख भारत ने PoK में जारी हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे पाकिस्तान के दशकों पुराने शोषण और दमन का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार अपनी जनता की जायज मांगों को सुनने के बजाय उन पर घातक बल का प्रयोग कर रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह नागरिकों पर हो रहे इस अत्याचार के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराए।

LoC खोलने की भावुक अपील प्रदर्शनकारियों ने पुंछ और डोडा सेक्टर के जरिए नियंत्रण रेखा (LoC) को खोलने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान द्वारा दी जा रही प्रताड़ना और खाद्य संकट से बचने के लिए यह रास्ता मानवीय सहायता के लिए खोला जाना जरूरी है। स्थानीय लोग अब पाकिस्तानी शासन से आजादी की मांग को और अधिक मुखर कर रहे हैं।

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