भारत के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ यूरोप में रची गई घिनौनी साजिश, क्या सच में डर गया है पश्चिम?
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नई दिल्ली: भारत के महानतम नायक और हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज आज एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार यह चर्चा उनके शौर्य के कारण नहीं, बल्कि उनके नाम का इस्तेमाल कर भारत को बदनाम करने की एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश के कारण है। फ्रांस के एक बड़े मीडिया हाउस फ्रांस-24 ने अपने संपादकीय में शिवाजी महाराज को मुस्लिम विरोधी प्रतीक बताकर एक खतरनाक नैरेटिव गढ़ा है।

फ्रांस-24 का भ्रामक नैरेटिव

फ्रांस के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान फ्रांस-24 ने हाल ही में एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था- India s Hindu Nationalists take 17th century King as new Anti-Muslim Symbol. इस लेख में दावा किया गया कि भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमाएं मुसलमानों को डराने के लिए स्थापित की जा रही हैं। यह तर्क न केवल अतार्किक है, बल्कि भारत के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की एक कुत्सित कोशिश है।

क्या शिवाजी महाराज मुस्लिम विरोधी थे?

इतिहास के पन्नों को पलटें तो सच्चाई बिल्कुल विपरीत है। शिवाजी महाराज की विशाल सेना में पठानों की एक समर्पित टुकड़ी थी, जिसमें 700 पठान सैनिक हमेशा तैनात रहते थे। उनके निजी अंगरक्षकों में सिद्दी इब्राहिम जैसे मुस्लिम योद्धा शामिल थे। फारसी इतिहासकार खाफी खान ने भी स्वीकार किया है कि शिवाजी महाराज ने युद्ध जीते, लेकिन कभी किसी मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचाया। उनके आदेश थे कि यदि युद्ध में कुरान शरीफ मिले, तो उसे ससम्मान वापस किया जाए। जो व्यक्ति स्वयं सभी धर्मों का सम्मान करता हो, उसे मुस्लिम विरोधी करार देना तथ्यों का अपमान है।

कौन रच रहा है यह भारत विरोधी एजेंडा?

इस लेख को किसी एक पत्रकार ने नहीं, बल्कि फ्रांस-24 ऑब्जर्वर्स के नाम से छापा गया है। इसमें एक्सपर्ट के तौर पर अमेरिका की सांता क्लारा यूनिवर्सिटी के शिक्षक रोहित चोपड़ा को पेश किया गया है, जो कथित हिंदू राष्ट्रवाद के आलोचक माने जाते हैं। यह स्पष्ट है कि बिना किसी ठोस आधार के, केवल भारत की छवि धूमिल करने के लिए इस एजेंडे को परोसा गया है।

फ्रांस-24 का असली DNA क्या है?

फ्रांस-24 जैसे मीडिया घरानों की फंडिंग सीधे फ्रांस सरकार से होती है। उनकी कथित सेकुलर विचारधारा असल में एक आर्टिफिशियल सेकुलरिज्म है। यह संस्थान अक्सर गैर-पश्चिमी देशों और इजरायल जैसे राष्ट्रों के खिलाफ नकारात्मक नैरेटिव सेट करने के लिए कुख्यात रहा है। आज फ्रांस खुद अपने यहां धार्मिक असंतोष और दंगों का सामना कर रहा है, जिसे छिपाने के लिए वे भारत जैसे देशों को निशाना बनाकर अपना प्रोपेगेंडा चला रहे हैं।

क्यों डर रहा है यूरोप?

भारत का तेजी से बढ़ता आत्मसम्मान और अपने महापुरुषों को वैश्विक पहचान दिलाना पश्चिम के कुछ वर्ग को रास नहीं आ रहा है। जब भारत जय शिवाजी का उद्घोष करता है, तो यह यूरोप के उन एजेंडा-आधारित मीडिया संस्थानों को अपनी विफल होती नीतियों का आईना दिखाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक राजा नहीं, बल्कि भारतीय गौरव का प्रतीक हैं, और उनके नाम पर विदेशी धरती पर रची जा रही यह साजिश भारत के बढ़ते प्रभाव से उपजी कुंठा मात्र है।

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