NDA में 17 साल के कैडेट की ट्रेनिंग के दौरान मौत, हेल्थ स्क्रीनिंग पर छिड़ी बहस
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राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में एक दुखद घटना सामने आई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी 17 वर्षीय प्रथम टर्म कैडेट अभिनव बाजपेयी की शुक्रवार सुबह फिजिकल ट्रेनिंग (PT) के दौरान मौत हो गई।

क्या हुआ था उस दिन? अधिकारियों के मुताबिक, नए बैच की पहली आधिकारिक फिजिकल ट्रेनिंग के दौरान अभिनव ने अचानक बेचैनी की शिकायत की। कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत खडकवासला स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पिछले अक्टूबर से NDA में प्रथम टर्म कैडेट की यह तीसरी मौत है। इससे पहले एक कैडेट की स्विमिंग प्रैक्टिस के दौरान और दूसरे की आत्महत्या के मामले में मौत हुई थी। फिलहाल, अभिनव की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी (COI) के आदेश दे दिए गए हैं।

डॉ. देवी शेट्टी की चेतावनी: फिट दिखना काफी नहीं इस घटना ने युवाओं में हार्ट हेल्थ को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मशहूर कार्डियक सर्जन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उनके अनुसार, देश के हर 17 वर्षीय युवा को कम से कम एक बार कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करानी चाहिए।

कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइन्स का हवाला देते हुए डॉ. शेट्टी कहते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है। धमनियों में जमा होने वाला यह साइलेंट किलर फैट भविष्य में हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

किस उम्र में क्या है जरूरी? डॉ. शेट्टी ने हृदय रोगों से बचाव के लिए उम्र के अनुसार ये दिशा-निर्देश दिए हैं:

स्पोर्ट्स और ट्रेनिंग में जोखिम डॉ. शेट्टी ने फीफा (FIFA) के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कई पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी भी मैदान पर कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए हैं। इससे साफ है कि सिर्फ फिट दिखना स्वस्थ दिल की गारंटी नहीं है।

विशेषकर जो युवा कठिन ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स या जिम में भारी एक्सरसाइज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए हार्ट स्क्रीनिंग एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है।

सावधानी ही बचाव है अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अभिनव की मौत के पीछे कोई मेडिकल स्थिति थी या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। हालांकि, यह घटना एक कड़ा सबक है कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं को पहचानने के लिए हमें बीमारी के लक्षणों का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय रहते जांच करवानी चाहिए।

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