नरोत्तम मिश्रा का कटा टिकट, दतिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं का भारी बवाल; जानें कौन हैं आशुतोष तिवारी?
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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार कर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले के बाद दतिया में भाजपा के भीतर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं।

कौन हैं आशुतोष तिवारी? आशुतोष तिवारी दतिया की भांडेर तहसील के पिपरौआ गांव के रहने वाले हैं। वे लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं। उन्होंने 2006 में जिला संगठन मंत्री और बाद में संभागीय संगठन मंत्री के रूप में काम किया। 2020 में शिवराज सरकार के दौरान उन्हें मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री का दर्जा) बनाया गया था। वे 2023 में सेवढ़ा से भी टिकट के दावेदार थे।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों कटा? दतिया लंबे समय से नरोत्तम मिश्रा का गढ़ रहा है, लेकिन 2023 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों हार का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने हार के बाद कराए गए आंतरिक सर्वे और फीडबैक रिपोर्ट के आधार पर इस बार नया चेहरा उतारने का जोखिम मोल लिया है।

सड़कों पर उतरी बगावत टिकट वितरण के बाद दतिया में जगह-जगह बाजार बंद रहे, टायर जलाए गए और हाईवे जाम कर दिए गए। नाराज समर्थकों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा ने 15 वर्षों तक क्षेत्र में दिन-रात काम किया है, जबकि आशुतोष तिवारी को जमीनी कार्यकर्ता ठीक से पहचानते भी नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक टिकट नहीं बदला जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

बीजेपी की बड़ी संगठनात्मक टूट सबसे बड़ा झटका तब लगा जब भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने अपने पद से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, पार्षद और दतिया के सभी 6 मंडलों के अध्यक्षों समेत सैकड़ों पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।

प्रशासनिक और कानूनी स्थिति दतिया के एएसपी मंजीत सिंह चावला ने बताया कि जिले में छह से अधिक स्थानों पर उग्र प्रदर्शन जारी हैं। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है।

गौरतलब है कि यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के कारण हो रहा है। भारती को एक पुराने आपराधिक मामले में तीन साल की सजा होने के बाद जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। अब देखना यह है कि भाजपा आलाकमान इस डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कदम उठाता है।

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